रोचक एवं जीवनोपयोगी साहित्य का स्रोत गायत्री पुस्तक मेला, शिमला

Published on 2017-12-23
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शिमला : गायत्री के ज्ञान से युग निर्माण योजना को प्रारंभ करने के लक्ष्य को लेकर शुक्रवार से राजधानी के गेयटी थिएटर में 8 दिवसीय पुस्तक मेले का शुभारंभ किया गया। गायत्री परिवार शिमला द्वारा अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान प्रारंभ किए गए इस पुस्तक मेले में बतौर मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी ने शिरकत की।

प्रो. एडीएन वाजपेयी ने पुस्तक मेले का अवलोकन किया तथा यहां पर उपलब्ध साहित्य के बारे में शिमला शहर और यहां आने वाले सभी पर्यटकों और युवाओं व बच्चों को पुस्तकों के अध्ययन की सलाह दी। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार पुस्तक मेले में अत्यंत प्रासंगिक, प्रेरणादायक एवं अनुकरणीय पुस्तकें उपलब्ध हैं। अध्ययन चेतना के जागरण के लिए तथा अध्ययन एवं अनुसंधान के लिए भी उपयोगी है। युवा पीढ़ी के लिए विशेषकर आवश्यक साहित्य है।

940 शीर्षकों सहित 26 बुक स्टाल स्थापित

पुस्तक मेले के उपलब्ध साहित्य में लगभग 940 शीर्षकों की पुस्तकें उपलब्ध हैं। जिसमें 26 विभिन्न शीर्षकों के साथ साहित्य स्टाल स्थापित किए गए हैं। आर्षग्रंथ, गायत्री मंत्री मंच के 24 अक्षरों की प्रेरणा, गायत्री महाविद्या का तत्वज्ञान, गायत्री के स्वरूप, रहस्य एवं उनकी शक्तियां, गायत्री संबंधी ग्रंथ में गायत्री महाविज्ञान पुस्तक प्रमुख है, ज्योतिष विज्ञान स्टॉल पर उर्दू में लिखित साहित्य भी उपलब्ध है, यज्ञ- कर्मकाण्ड एवं साहित्य, श्रीराम शर्मा आचार्य प्रणीत सम्पूर्ण वांडमय्, गीत- संगीत साहित्य, श्रीराम शर्मा आचार्य का जीवन दर्शन एवं उनके वचनामृत, स्वास्थ्य औषधि जिसमें मुख्य रूप से आयुर्वेद का प्राण :: वनोषधि विज्ञान पुस्तक मुख्य है, क्रांति धर्मी साहित्य जिसमें युग परिवर्तन की पृष्ठ भूमि और रूपरेखा का वर्णन है, हमारे 7 आंदोलन में आंतरिक कायाकल्प, साधना, स्वर योग, दिव्य योग, उपासना, ब्रह्मवर्चस्, व्यक्ति निर्माण में वर्तमान चुनौतियों पर विस्तृत साहित्य, परिवार निर्माण, अध्यात्म का वैज्ञानिक प्रतिपादन, प्रज्ञा लघु पुस्तक माला, अंग्रेजी पब्लिकेशन, विद्यार्थियों के लिए उपयोगी, महापुरुषों के प्रेरक जीवन वृतांत, भारतीय धर्म एवं दर्शन, आत्मचिन्तन एवं अध्यात्मवाद, व्यसन मुक्ति एवं पर्यावरण, नारी जागरण स्टाल पर महिला उत्थान व विकास के लिए आधी जनशक्ति अपंग न रहे जैसे साहित्य भी उपलब्ध हैं, साथ ही समाज को स्वच्छता की ओर प्रेरित करने के लिए साहित्य उपलब्ध हैं।


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