Published on 2015-07-09

उद्देश्य - धरती पर वृक्ष लगाऐं, और इसे स्वर्ग बनाऐं।
प्रकृति माता के अनुदान पाऐं, आपदाओं को दूर भगाऐं।।

लक्ष्य - गुरू पूर्णिमा महोत्सव (31 जुलाई 2015 से ) सम्पूर्ण देष में वृक्षों का रोपण एवं तरुपुत्र/तरुमित्र बनाकर उनका पालन। सघन वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाना ।

आत्मीय बन्धुओं/बहिनों,
आगामी गुरूपूर्णिमा महापर्व पर हार्दिक प्रणाम्।
युगऋषि  करोड़ों के सद्गुरू, पिता एवं मार्गदर्शक हैं। उनका आश्रय पाकर अनेक देव आत्माऐं
अपनें स्वयं को बदलकर संसार को स्वर्ग जैसा सुन्दर बनाने में निष्काम भाव से संलग्न हैं।

आओ सब मिलकर अपने संकल्प को पूर्ण करें।

श्रद्धांजली का स्वरूप (वृक्ष कहाँ व कैसे लगाऐं) -

  1. सूखी पहाड़ी पर तरूपुत्र यज्ञ कराकर संकल्प पूर्वक वृक्षारोपण कर स्मृति उपवन बनाना।
  2. शहर में उजडे़ उद्यान गोद लेकर उन्हें विकसित करना/स्मृति उपवन बनाना।
  3. नदियों को हरी चूनर चढ़ाना(तटों पर भूमि क्षरण रोकने वाले एवं औषधीय वृक्षों का रोपण करना)
  4. मंदिरों/उद्यानों में नक्षत्र वाटिका, राशि वाटिका, ग्रह वाटिका, वास्तु वाटिकाओं का निर्माण।
  5. प्रत्येक शक्तिपीठ पर उपरोक्त वाटिकाओं का निर्माण।
  6. मंदिरों में पर्यावरण शुद्धि हेतु त्रिवेणी (पीपल, बरगद, नीम) अथवा पंचवटी (नीम,
  7. पीपल, बरगद, जामुन, आंवला) रोपण, हरिशंकरी का रोपण।
  8. प्रत्येक गांव के देव स्थान/वन गोचर, बंजर भूमि में 51 पौधों का रोपण।
  9. प्रति विद्यालय जहाँ (भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का आयोजन होता है) में 24 पौधों का रोपण, तरूमित्र योजना।
  10. एक परिजन - एक तरू/पौधा/वृक्ष लगाए तो भी सहजता से लक्ष्य पूर्ण हो जाएगा।
  11. तरूपुत्र /तरूमित्र का संकल्प लें।
  12. राष्ट्रीय/राज्य राजमार्गों के किनारे (फलदार/छायादार वृक्ष) वृक्षारोपण।
  13. श्मशान घाट पर (पर्यावरण, धार्मिक महत्व व छायादार वृक्ष) वृक्षारोपण।
  14. खेतों की मेड़ों पर फलदार एवं कृषि उपयोगी/व्यवसायिक लाभकारी पौधों का रोपण।
  15. तकनीकी/प्रबंधन/चिकित्सा/अन्य महाविद्यालयों के परिसरों में सम्पर्क कर वृक्षारोपण करें।

भूमि, साधन एवं पौधे कहाँ से प्राप्त करें -
  1. ग्रामीण क्षेत्र में भूमि पर वृक्षारोपण हेतु संबंधित पटवारी से उस स्थान का खसरा निकलवाऐं, तत्पश्चात् उस भूमि पर वृक्षारोपण हेतु ग्राम पंचायत में प्रस्ताव पास करवाकर वृक्षारोपण करे जिसमे पंचायत का सहयोग भी लिया जाये।
  2. रास्ते के दोनों ओर वृक्षारोपण हेतु पंचायत द्वारा तार फेन्सिंग करवाकर वृक्षारोपण करें जिन्हें पालने की जिम्मेदारी आस - पास के दुकानदारो या रहवासियों को दी जा सकती है।
  3. रेलवे के भूभाग पर वृक्षारोपण करने के लिए रेल विभाग से अनुमति व सहायता ली जा सकती है।
  4. विद्यालयों मे ईको क्लब को प्रति वर्ष राषि माध्यमिक, हाईस्कूल व हायर सेकेन्ड्री शालाओं को प्राप्त होते है। प्राचार्य से चर्चा कर विद्यालयों में तरूमित्र योजना द्वारा विद्यार्थियों को पर्यावरण आन्दोलन से जोड़कर पौधारोपण कर उनके संरक्षण का दायित्व विद्यार्थियों को दिया जाए।
  5. नगरीय क्षेत्रों में नगर पालिक निगम या नगर पंचायत से ट्री-गार्ड की व्यवस्था बनवाई जा सकती है।
  6. सस्ते बाँस खरीद कर तिकोन बना बांस की चिपली से भी सस्ते ट्री-गार्ड बनवाये जा सकते है।
  7. राष्ट्रीकृत बैंक/बीमा/निजी कम्पनियाँ आदि भी वृक्षारोपण हेतु ट्री गार्ड व साधन उपलब्ध करवाती है उनसे भी इस कार्य हेतु सहयोग लिया जा सकता है। बिना सुरक्षा घेरे के वृक्ष लगाना व्यर्थ हो सकता है जिसमें हमारा समय, श्रम व धन निष्फल हो जायेगा।

समयबद्ध कार्य योजना:- ( 31 जुलाई से 29 अगस्त, श्रावणी पर्व तक )
  • प्रांतीय बैठक एवं प्रांत/जिला स्तरीय वृक्षगंगा समिति का निर्माण
  •  कुल कितने वृक्ष लगाऐंगे इसका निर्धारण / संकल्प
  •  वृक्षारोपण हेतु स्थानों का चयन निर्धारण
  • वृक्षों की सूची तैयार करना (फलदार / औषधीय/पर्यावरण एवं धर्मिक महत्व के पौधे)
  • तरूपु़त्र / तरूमित्र पालक समिति - पौधों की उपलब्धता हेतु राज्य सरकार /वन विभाग /जिला प्रशासन को आवेदन एवं सहयोग हेतु संपर्क
  • नर्सरी हेतु शक्तिपीठों पर उपलब्ध भूमि का चयन
  •  नर्सरी में पौधे तैयार करना / करवाना
  •  सरकारी नर्सरी का भ्रमण एवं पौधे तैयार करनें हेतु निवेदन
  •  पौधे हेतु दानदाताओं से सहयोग
  •  भूमि की तैयारी
  •  गढ्ढे खोदना
  •  फैंसिंग लगाना
  •  गार्ड तैयार करना
  •  तरूपिता /तरूमित्रों का पंजीयन/सूची तैयार करना, संकल्प पत्रक भराना
  •  वृक्षगंगा अभियान पर विविध विशयों पर प्रतियोगिताएॅं (चित्रकला, भाषण, निबंध)
  •  प्रबुद्ध वर्ग में परिचर्चा
  •  गढ्ढों में मिट्टी व खाद भराई
  •  सिंचाई प्रबंध
  •  रक्षा समितियों का गठन
31 जुलाई 2015-
  • गुरूपूर्णिमा महापर्व पर ‘‘वृक्ष गंगा महोत्सव’’ वृक्षारोपण।
  • तरूपुत्र/तरूमित्र यज्ञों का आयोजन
  • मृत वृक्षों का प्रतिस्थापन (Replacement) 
  • पौधों पर नाम पट्टी लगाना
  • साधना एवं यज्ञों में न्यूनतम 1000 वृक्षों को प्रसाद रूप में संकल्प पूर्वक वितरण
  • रोपण की सूची तैयार करना केन्द्र को नाम - पते सहित सूची भेजना।
  • धन्यवाद ज्ञापन एवं अभियान समीक्षा
मंदिर जनजागरण के केन्द्र बनें

पर्यावरण आन्दोलन के लिये हमारे परिजन/प्रज्ञा मंडल एक-एक मंदिर गोद लेने का संकल्प लें तथा उसे उत्कृष्ट पर्यावरण केन्द्र के रूप में निम्नलिखित अनुसार विकसित करें -

  1. वृक्षारोपण - तुलसी, केला, फूल के पौधे, षमी इत्यादी धार्मिक महत्व के वृक्ष(त्रिवेणी, पंचवटी तथा हरिशंकरी आदि)
  2. वृक्ष सेवा - सही ढ़ंग से सिंचाई, सही ढ़ंग से वृक्षों की देखभाल, सीमेन्ट का
  3. चबूतरा तोड़ना व फर्श हटाना, थाला बनायें, वृक्ष के नीचे की भूमि को भुरभुरा बनायें
  4. ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण
  5. प्लास्टिक नियंत्रण
  6. पूजन सामग्री का सम्यक निस्तारण, नियंत्रण
  7. सद्वाक्य / पर्यावरण संबंधी नारे लेखन
  8. स्वच्छता
  9. सौर ऊर्जा के उपकरण लगायें।




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