Published on 2015-10-13
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गंगा नदी, जो इस देश में एक नदी नहीं, वरन्ï संस्कृति की संवाहक एवं करोड़ों भारतवासियों की, जो देश में एवं देश से बाहर भी रहते हैं, सबकी आस्था का केन्द्र है। हर भारतवासी की जीवन में एक ही इच्छा होती है कि एक बार गंगा में स्नान हो जाय एवं उसके जीवन के अंतिम क्षण में गंगा जल की एक बूंद मुख में पड़ जाये। हम इसे आध्यात्मिक मुक्ति का मार्ग मानते हैं एवं यह भी मानते हैं कि गंगा के स्मरण, दर्शन मात्र से सात जन्मों के पाप धुल जाते हैं, किंतु युगों युगों से हमारे पाप धोते धोते स्वयं माँ गंगा इतनी गंदी हो गई है कि अब उसके शुद्घिकरण की आवश्यकता आन पड़ी है।

हमारी श्रद्घा का केन्द्र एवं देश की पोषक माँ गंगा की पीड़ा भरी पुकार सुनकर, युग निर्माण योजना के ध्वज वाहक, अखिल विश्व गायत्री परिवार के देशभर के लाखों परिजनों ने शान्तिकुन्ज हरिद्वार स्थित अपने वैश्विक मुख्यालय के आव्हान पर सफाई का बीड़ा उठाया है एवं इसके लिये दीर्घकालिक निर्मल गंगा जन अभियान का शुभारंभ किया गया।

इससे पूर्व गायत्री परिवार द्वारा अपने भागीरथी जलाभिषेक अभियान के अंतर्गत देश की प्रमुख नदियों पर स्वच्छता का कार्य आरंभ किया गया जिसमें प्रमुख रूप से नर्मदा, ताप्ती, बनास, सरयू, गोमती, शिवना एवं डोही आदि के नाम लिये जा सकते हैं। इस संबंध में विशेष प्रयास के रूप में नेपाल की गंगा मानी जाने वाली  काठमाण्डू की बागमती की सफाई का उल्लेख किया जा सकता है जिसमें स्थानीय निवासियों के विशेष प्रयास एवं वहाँ  की सत्तासीन सरकार एवं पूरी सरकारी मंत्रणा के सहयोग से नदी का स्वरूप पूरी तरह बदलने जा रहा है। इन्हीं प्रयासों की सफलता से प्रेरित होकर गंगा की स्वच्छता अभियान के शुभारंभ का कार्य आरंभ किया गया।

गायत्री परिवार के संस्थापक, प पू पं श्रीराम शर्मा आचार्य एवं वंदनीय माताजी भगवती देवी शर्मा के सूक्ष्म मार्गदर्शन के साथ नवंबर 2012 को इस योजना की घोषणा की गई, जिसका वास्तविक क्रियान्वयन जनवरी 2013 से आरंभ हुआ।
माता गंगा के गंगोत्री से गंगा सागर तक के 2525 कि मी के जल प्रवाह की निर्मलता के पुनस्र्थापन के उद्ïदेश्य से चलाया गया यह अभियान वर्ष 2026 तक के लिये निर्धारित किया गया  है। कार्य की सुगमता एवं प्रभावी नियंत्रण बनाये रखने एवं सबकी सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु नदी की पूरी लंबाई को पांच अंचलों में बाँटा गया यथा, गंगोत्री से हरिद्वार तक - भागीरथी अंचल, हरिद्वार से कानपुर तक - विश्वामित्र अंचल, कानपुर से बलिया तक - भारद्वाज अंचल, बलिया से सुलतानपुर तक - गौतम अंचल एवं सुलतानपुर से गंगा सागर तक - रामकृष्ण अंचल, इस प्रकार प्रत्येक अंचल लगभग 500 कि मी के क्षेत्र का है एवं उनके दाँये बाँये तट मिलाकर, कुल दस अंचल हो जाते हैं। आगे हर अंचल में प्रत्येक 100 कि मी का एक उपांचल एवं उसमें प्रत्येक 25 कि मी का प्रखण्ड बनाया गया है, इस प्रकार प्रांत स्तर से लेकर गाँव स्तर की भागीदारी हो जाती है।

यह योजना कुल पाँच चरणों में चलेगी जिसमें सर्वेक्षण, गंगा संवाद-माँ गंगा की कथा व्यथा, गंगा अमृत कलश यात्रा, सहयोग आंदोलन एवं दूषित जल स्रोत प्रबंधन आदि चरण सम्मिलित हैं। प्रथम चरण सर्वेक्षण कार्य के लिये था जिसमें गायत्री परिवार के श्रमशील कार्यकर्ताओं ने गंगा के किनारे-किनारे पैदल यात्रा करके विभिन्न जानकारी एकत्र की। इसके अंतर्गत मु[य रूप से, उस स्थान पर गंगा के घाटों की स्थिति, वहाँ  पर चल रहे इस प्रकार के किसी अभियान की जानकारी, वहाँ उपलब्ध कोई स्वयंसेवी संस्था, वहाँ के विभिन्न क्षेत्रों के प्रभावशाली व्यक्ति-प्रतिनिधी, उस स्थान पर प्रदूषण की स्थिति, कारण एवं वहाँ पर किस प्रकार के कार्य की आवश्यकता है आदि पर जानकारी एकत्र की गई। इस जानकारी का प्रयोग इस अभियान के अगले चरणों में किया जाना है। इसके लिये वहाँ पर आवश्यक स्थानों पर कैमरों से चित्र भी लिये गये। कार्यकर्ताओं ने पूर्ण लगन एवं सावधानी से जानकारियाँ एकत्र कीं। आवश्यकतानुसार कुछ स्थानों पर उपलब्ध यंत्रों से जल में प्रदूषण के प्राथमिक स्तर की भी जांच करवाई गई। इस चरण के निष्कर्षों का यदि उल्लेख करें तो हमारा जल मल निस्तारण, उद्योगों का कचरा, शव प्रवाह एवं सबसे ऊपर हमारी उदासीन मानसिकता के साथ कुछ  बदलने की इच्छाशक्ति का अभाव ही गंगा को मलिन करने के लिये जवाबदेह है।

इस चरण के पूर्णता के पश्चात्ï  चयनित कार्यकर्ताओं को यथेष्टï प्रशिक्षित कर द्वितीय चरण हेतु दोनों तटों पर विदा कर दिया गया। इस चरण में गंगा के तटीय नगरों-गाँवों में 150 स्थानों पर तीन दिवसीय गंगा संवाद-माँ गंगा की कथा व्यथा का विधिवत आयोजन किया गया। इसमें दृश्य श्रव्य माध्यमों से गंगा की पौराणिक-ऐतिहासिक कथा, महत्व एवं उसके प्रदूषण की बात एवं उसके निराकरण हेतु मानस बदलने की बात की गई। यह चरण मु[य रूप से जनजागरण हेतु था जिसमेंं लोगों को संकल्पित कराया गया कि कम से कम मेरे द्वार से आगे गंगा का जल स्वच्छ ही जायेगा। इसके अंतर्गत लगभग 10 लाख लोग संकल्पित हुये। यह कार्य निरंतर एवं सुनिश्चित जवाबदेही के साथ चलता रहे इसके लिये स्थाई रूप से सभी गांवों में 400 गंगा सेवक मण्डलों का गठन कर शान्तिकुन्ज के निर्मल गंगा जन अभियान कार्यालय में पंजीबद्घ किया गया। इसके अतिरिक्त सैकड़ों लोगों ने इस कार्य में आर्थिक एवं विभिन्न प्रकार की मदद एवं समयदान करने का संकल्प भी व्यक्त किया।

अभियान के तृतीय चरण, गंगा अद्गृत कलश यात्रा के सार्थक क्रियान्वयन हेतु, देशभर से चयनित कार्यकर्ताओं का हाल ही में शान्तिकुन्ज में गोष्ठïी सह प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। सितंबर 2014 से फरवरी 2015 तक चलने वाले इस चरण में नौ अंचलों में पाँच गंगा रथों के माध्यम से पद यात्रा, स्वच्छता, वृक्षारोपण रैली/सभायें, दीवार लेखन, गंगा सेवा मण्डल,जन जागरण किया गया। इन रथों का निर्माण यहीं शान्तिकुन्ज में किया जा गया है जिसमें गोमुख से भरकर लाया गंगा का निर्मल जल कलश स्थापित था जिसके माध्यम से यह संदेश दिया गया कि हमें गंगा के पूरे प्रवाह को इसी भाँति निर्मल बनाना है। इस यात्रा में विशेषज्ञ कार्यकर्ताओं की टोली विविध कामों के लिये साथ-साथ चल रही थी।

इस चरण के प्रथम भाग का शुभारंभ दि 21 सितं 2014 को गंगोत्री से गंगा पूजन अभिषेक के साथ किया गया जिसमें एक दिन पूर्व गोमुख से लाये गये पवित्र जल एवं गंगोत्री के जल से कलश भरकर गंगोत्री नगर का भ्रमण किया गया, इसके पश्चात् गायत्री परिवार प्रमुख डॉ प्रणव पण्ड्या जी ने कलश पूजन कर रथ को हरी झंडी दिखा कर यात्रा पथ के लिये विदा कर दिया। इस यात्रा का द्वितीय भाग दि 3 अक्टू 2014 को शान्तिकुन्ज से शेष चार रथ पूजन कर आरंभ किया गया जो पहले बाँयें तट पर चला एवं उसके पश्चात् दाँये तट पर चला इस प्रकार यात्रा का क्रम पूर्ण हुआ। इस चरण में कई विशेष उपलब्धियां हुईं जिनमें अनेक विद्यालय, शिक्षा संस्थान, व अन्य सम्प्रदायों के लोग जुडऩे का क्रम हुआ। इस बार भी व्यापक स्तर पर जन सम्पर्क हुआ और लाखों लोगों को जन जागृति संकल्प कराया गया व एक हजार से अधिक गंगा सेवक मण्डल बनाये गये एवं लगभग 10 लाख से अधिक लोगों को संकल्पित किया गया।

इसके पश्चात्ï चतुर्थ चरण में जन जागरण के बाद हर तटवर्ती नगर-ग्राम में सहयोग आंदोलन चलाया जायेगा जिसमें लोगो को समझाने के लिये गोष्ठïी, धरने, रैली, जनहित याचिका, ज्ञापन, पोस्टर आंदोलन आदि विधि-सम्मत उपायों की मदद से व्यवस्था के साथ सहकार आंदोलन चलाया जायेगा। विश्वामित्र एवं भागीरथ अंचलों के प्रत्येक जिला मुख्यालय पर गंगा सेवक मण्डलों के इस चरण की पूर्व तैयारी एवं प्रशिक्षण हेतु शान्तिकुन्ज की टोलियों ने 33 जिलों में गोष्ठियाँ की जिसमें बड़ी संख्या में समयदानी आगे आये। इस चरण में सायकिल यात्रा की योजना है जिसमें जिले के कार्यकर्तागण अपने जिले में ही गांव गांव घूमकर अभियान को जन जन तक फैलायेंगे, इसमें क्षेत्र स्तर से सायकल के लिये अंशदान का संकल्प भी हुये। इस चरण में गंगा सफाई अभियान के साथ साथ, वृक्षारोपण, सफाई, आदर्श ग्राम आदि की भी बात लोगों के बीच पहँुचाई जायेगी।

चतुर्थ चरण में प्रथम क्रम में 100 सायकल यात्री गंगा ग्राम सायकिल यात्रा पर निकलेंगे जिसमें तट के हर गांव के प्रत्येक घर में गंगा स्वच्छता का संदेश पहँुचाया जायेगा। इसमें गंगा सफाई के संकल्प के साथ- घर घर देव स्थापना, वृक्षारोपण, दीवार लेखन, घाटों की सफाई एवं गंगा सेवक मण्डलों के निर्माण के कार्य होंगे। इससे पूर्व गायत्री परिवार के मुख्यालय के आव्हान पर आगामी 18 अक्टूबर 2015 को पूरे देश में एक साथ एक दिन 150 घाटों पर सफाई कार्य किया जायेगा। इसी कड़ी में गंगा सफाई के समयदानियों के प्रशिक्षण सत्र के साथ साथ शान्तिकुन्ज द्वारा प्रतिवर्षानुसार हर की पैडी का सफाई का कार्यक्रम भी 25 अक्टूबर 2015 को निर्धारित किया गया है।

पंचम चरण में गंगा की स्वच्छता को अक्षुण्ण बनाये रखने हेतु अन्य सहायक नदियों एवं देश की सभी नदियों की सफाई हेतु अभियान आरंभ होगा क्योंकि यदि गंगा को स्वच्छ कर लिया गया किंतु अन्य नदियों में वही गंदा प्रवाह रहा तो कालांतर में पूर्वस्थिति निर्मित हो जायेगी एवं  हमारा सारा प्रयास व्यर्थ हो जायेगा।

जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्टï है, हमारा यह पूरा अभियान जन सहयोग आधारित है एवं इसका मूल है जन जन का मानस बदलना, बार बार गंदगी साफ करने से अच्छा है कि उसके स्रोत को ही बंद किया जाये। 

हमारी विचारधारा लोगों तक पहुँचाने हेतु हमारे सहायक प्रयासों के रूप में शान्तिकुन्ज से इस अभियान की एक पुस्तिका निकाली गई है, गंगा पर प्रेरणापरक गीत, छोटे छोटे भाषण आदि  लिखे एवं रिकार्ड किये गये हैं, एक लघु फिल्म का निर्माण कराया गया है, इस विषयक पर्चे एवं पोस्टर बनवा कर उन्हें सबको उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जा रहा है।

भारतमाता के जागरूक पुत्र होने के नाते हमारा यह छोटा सा प्रयास है, इसीलिये देश की नियंत्रक, संचालक एवं नीति निर्माता होने के नाते अपनी संवेदनशील एवं जनहित चिंतक सरकार एवं गंगा को माता मानने वाले आस्थावान देशवासियों से हमारी  यही प्रार्थना है कि यदि हम दृढ़ संकल्पित हों तो गंगा को स्वच्छ होने में कोई विलंब नहीं होगा एवं करोड़ों लोगों की आस्था का केन्द्र माँ गंगा फिर से पूर्ववत निर्मल एवं अविरल हो जायेगी अन्यथा वैज्ञानिकों की चेतावनी के अनुसार इस धरती से माँ गंगा लुप्त हो गई तो आने वाली पीढ़ी हमें इस अपराध के लिये कभी क्षमा नहीं करेगी।



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