Published on 2015-10-27

हरिद्वार में आज गंगा की कल-कल छल-छल ध्वनियों की जगह गायत्री परिवार के हजारों स्वयंसेवकों की ओर से गायत्री महामंत्र की स्वर-लहरियां लहनाने लगीं। ऐसा लग रहा था मानो गंगामैय्या ने पीतवस्त्र ओढ़ लिया हो। गायत्री परिवार के लगभग पांच हजार से अधिक स्वयंसेवकों ने गंगाजी में उतरे थे जिन्होंने वहाँ जमकर पसीना बहाया। इस दौरान हरिद्वार के हृदय स्थल माने जाने वाले हरकी पौड़ी से ललतारौ पुल तक करीब २ किमी लम्बे क्षेत्र के दोनों तटों से सैकड़ों टन कूड़े-करकट, गंदे कपड़े आदि निकाले गये।

     हरकी पैड़ी से लेकर ललतारौ पुल तक को ७ सेक्टर में बाँटकर शांतिकुंज के अनुभवी कार्यकर्त्ताओं के नेतृत्व में करीब ५ हजार से अधिक स्वयंसेवकों ने अनुशासित होकर अपने-अपने कार्यक्षेत्र में सफाई की। अलीगढ़ से अपने अभिभावकों के साथ आये तीन साल के तेजस कुमार से लेकर ९० वर्ष तक के युवा मन वाले उत्साही लोग निर्मल गंगा अभियान में जुट गये। उन्होंने मानव शृंखला बनाकर गंगा मैय्या की गोद से सैकड़ों टन कूड़े-कचरे, गंदे कपड़े निकाल कर तटों पर इकट्ठे किये, जिनको शांतिकुंज के सौजन्य से आये ट्रेक्टर ट्रालियों ने शहर से बाहर जाकर खाली किया। इससे पूर्व एडीएम ने फावड़े, तशले व झाडू आदि सफाई सामग्रियों का पूजन कर सातों सेक्टरों को प्रतिनिधियों को सौंपा।

अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने बताया कि गायत्री परिवार ने गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक २५२५ किमी की दूरी तय करने वाली पापनाशिनी माँ गंगा को स्वच्छ करने का बीड़ा उठाया है। इस हेतु राष्ट्रीय स्तर पर निर्मल गंगा जन अभियान का शुभारंभ किया जा चुका है। गंगा के दोनों तटों की ओर बसने वाले लोगों में जन जागरण किया जा रहा है। उन्हें भारत की जीवनदायिनी माँ गंगा को निर्मल बनाये रखने में सहयोग करने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गंगोत्री से गंगासागर तक के तीन चरण के कार्य पूरे हो चुके हैं और चौथे चरण में २७ अक्टूबर को गोमुख से गंगासागर तक जन-जन को गंगा स्वच्छता के प्रति सचेत करने एवं संकल्प दिलाने हेतु गंगा ग्राम यात्रा के लिए पांच सौ साइकिल टोलियाँ निकल रही हैं। संस्था की अधिष्ठात्री शैल दीदी ने कहा कि सबसे बड़ी आवश्यकता आस्था और विचारों को बदलने की है। माँ को दूषित कर पुण्य कमाने की मानसिकता को हमें बदलना है। सारा कचरा माँ के पेट में डालकर पुण्य कमाने के भ्रम को मिटाना होगा। जनमानस को बदले बिना देश की नदियों का शुद्धीकरण संभव नहीं है। शांतिकुंज के व्यवस्थापक श्री गौरीशंकर शर्मा ने बताया कि इस अभियान में प्रत्येक वर्ष गंगा क्लोजर के समय गायत्री परिवार के हजारों कार्यकर्त्ताओं की भूमिका सर्वोपरि रहती है। आज के इस अभियान में नई टिहरी से लेकर बलिया तक गंगा किनारे बसे गांव-कस्बों, शहरों के हमारे कार्यकर्त्ता भाई-बहिन शामिल होने आये हैं।

सफाई महाभियान के संयोजक केपी दूबे के अनुसार नई टिहरी, देहरादून, हरिद्वार, गौतमबुद्धनगर, हापुड़, शामली, गाजियाबाद, सहाहरनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, अलीगढ़, बुलंदशहर, बागपत, मु०नगर, संभल, जेपीनगर, मेरठ, बलिया, वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली, भदोही, मिर्जापुर, इलाहाबाद, प्रतापगढ़, कौशाम्बी, फतेहपुर, रायबरेली, बदायूं सहित उप्र व उत्तराखंड के ३५ जिलों से आये पांच हजार से अधिक स्वयंसेवी कार्यकर्त्ता इस सफाई अभियान में शामिल हैं। इनके अलावा शांतिकुंज के अंतेःवासी कार्यकर्त्ता, देवंसस्कृति विवि के प्रोफेसर्स, स्टाफ, विद्यार्थी, एनएसएस के छात्र-छात्राएँ, गायत्री विद्यापीठ के स्काउट-गाइड के बच्चे व शिक्षक सहित विभिन्न साधना सत्रों में आये हजारों साधकों ने भाग लिया। सभी अपने हाथ में खुरपी, फावड़ा, तगाड़ी, झाडू लिए गंगा मैय्या की गोद में चारों तरफ बिखर गए, जो निर्मल गंगा अभियान के संदेश को विश्व भर में फैलाने के लिए कृतसंकल्पित थे। वहीं शांतिकुंज की एम्बूलेंस भी अपनी सेवा में तत्पर रही। 



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