Published on 2015-10-28
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गंगा स्वच्छता के प्रति प्रेम ही गंगा की सच्ची भक्ति-डॉ. पण्ड्या

निर्मिल गंगा जन अभियान के अन्तर्गत अखिल विश्व गायत्री परिवार का केन्द्र शान्तिकुञ्ज-हरिद्वार द्वारा पिछले कई वर्षों से नदियों की सफाई का कार्य किया जा रहा है। इस शृंखला में अब तक भारत की कई नदियों व उनके तटों पर सफाई कार्य चले रहे हैं तथा उसके साथ ही नदियों के तटों एवं अन्य क्षेत्रों में भी वृक्षारोपण कर नदियों के तटों की प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करने के साथ ही धरती माता को हरी चूनरी पहनाई जा रही है। सफाई के साथ वृक्षारोपण का कार्य ऐसा है जिनसे स्वास्थ्य रक्षा भी होती है और पर्यावरण सन्तुलन की दिशा में महत्त्वपूर्ण योगदान भी होता है। इसी के मद्देनजर शांतिकुंज से आज १०० साइकिलों की टोली रवाना हुई। गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने युगसैनिक गंगा प्रेमियों की इस साइकिल यात्रा को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। 
इस अवसर पर डॉ. पण्ड्या ने कहा कि साइकिल वह माध्यम है जिसकी सहायता से भारत के गाँव-देहातों में बसे आधी आबादियों तक गंगा स्वच्छता का संदेश पहुँचाया जा सकता है और जन मानस को इसके लिए जाग्रत किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जब तक व्यापक रूप से जन जागरण नहीं हो जाता तब तक व्यापक स्तर पर नदियों का सफाई कार्य नहीं हो सकता। राष्ट्र का हर नागरिक जागेगा तभी राष्ट्रहित के कार्य सुचारू रूप से हो सकेंगे। 
डॉ. पण्ड्या ने बताया गंगा हमारी माँ है। अतः गंगोत्री से गंगा सागर तक २५२५ किमी लम्बी गंगा की स्वच्छता के लिए गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों में बसे हर गाँव और शहर के हर आदमी को गंगा के सफाई कार्य के प्रति रुचि दिखाना होगा और सक्रिय भूमिका निभाते हुए सच्ची गंगा भक्ति का परिचय देना होगा। शांतिकुंज के तत्त्वावधान व मार्गदर्शन में भारत भर में फैले गायत्री परिवार के परिजन वर्षों से नदियों, तालाबों, घाटों, रास्तों, स्कूल-कॉलेजों तथा ग्रामों की सफाई कार्य करते आ रहे हैं। इस हेतु साइकिल यात्राओं के आयोजन भी समय-समय पर परिजनों द्वारा होते रहे हैं। 
डॉ. पण्ड्या ने कहा मोटर गाड़ियों में रोड़-रास्तों से जुड़े शहरों, नगरों-महानगरों और बड़े गाँव-कस्वों तक यात्रा हो सकती है। इसके लिए वह उपयोगी माध्यम है। परन्तु यह अमीरों के माध्यम हैं। इन माध्यमों का उपयोग भारत का हर आदमी नहीं कर सकता। किन्तु साइकिलों से हर गाँव ही नहीं, हर स्थानों पर जाया जा सकता है और हर व्यक्ति से सम्पर्क साधा जा सकता है। 
उन्होंने कहा कि एक समय महात्मा गाँधी ने खादी वस्त्रों के उत्पाद एवं उपयोग पर जोर दिया था। इसके पिछे उनका तात्पर्य स्वावलम्बी जीवन, सादगी व स्वाभिमानी जीवन, कर्मशील व परिश्रमी जीवन से था। क्योंकि परिश्रम अपने आप ही मनुष्य को स्वस्थ, सबल, हृष्टपुष्ट व सुन्दर बनाये रखने के लिए वरदान सा है। गंगा सफाई हेतु साइकिल के माध्यम का चयन भी स्वास्थ्य, सुविधा, कर्मशीलता, सादगी तथा आर्थिक स्थितियों पर ध्यान रखकर किया गया है। डॉ. पण्ड्या के अनुसार साइकिल यात्रा से जहाँ शरीर का व्यायाम होता है, वहीं गंगा सफाई जैसे पवित्र कार्य के प्रति श्रम की सार्थकता भी सिद्ध होती है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए डॉक्टर व फिजियोथैपेपिस्ट योग व्यायाम की सलाह देते हैं। यह उपचार गंगा स्वच्छता हेतु की जा रही साइकिल यात्रा से आसानी से पूरा हो जाता है। 
शांतिकुंज के व्यवस्थापक श्री गौरीशंकर शर्मा के अनुसार शांतिकुंज के मार्गदर्शन में पिछले दिनों गंगा तथा नर्मदा आदि नदियों पर सफाई कार्य चलते रहे हैं और चलते रहेंगे। यहाँ हरिद्वार में भी प्रति वर्ष गंगा क्लोज के अवसर पर हरकीपौड़ी से रेलवे स्टेशन तक सफाई कार्य आयोजित होते हैं जिनमें निकटवर्ती क्षेत्रों से हजारों गायत्री परिजन आकर सफाई करते हैं। 
इस अभियान पर कार्य कर रहे श्री केदार प्रसाद दुबे ने बताया कि शांतिकुंज के अलावा देश के विभिन्न स्थानों से भी गंगा सफाई हेतु साइकिल टोलियाँ निकलेंगी और निर्दिष्ट स्थानों पर जाकर गंगा सफाई कार्य में सम्मिलित होंगी। ये सभी गंगाप्रेमी साइकिल यात्री गंगोत्री से गंगासागर तक के तटीय क्षेत्रों में बसे गाँवों और शहरों में जाकर गंगा स्वच्छता के सन्देश देंगे। उन्होंने बताया कि गायत्री परिवार प्रमुख आदरणीया शैलबाला पण्ड्या जी ने कहा है, गंगा सहित पचास से अधिक नदियों तथा अन्य क्षेत्रों में भी चल रहे सफाई का यह कार्य सतत चलते रहने चाहिए और इसके साथ वृक्षारोपण भी होते रहने चाहिए ताकि पर्यावरण सन्तुलन बना रहे। उन्होंने इस कार्य हेतु दूसरों को प्रेरित करने की भी बात कही। इस अवसर पर शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्त्ताओं सहित शिविरार्थीगण भी मौजूद थे।


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