Published on 2016-09-08

गंगा की स्वच्छता के साथ इन गाँवों के आदर्श विकास का है लक्ष्य
प्रमुख बातें
• प्रत्येक गाँव के हर जाति, धर्म, वर्ग के घर से संपर्क किया, मंगल द्रव्यों की स्थापना की और गंगा स्वच्छता के संकल्प दिलाये।
• ६ माह में ५००० घरों से कई बार संपर्क किया।
• ४०० ग्रामवासी युवा अभियान से जुड़े।

प्रधानमंत्री कार्यालय से
• सर्वेक्षण के आंकड़े केन्द्र सरकार को भेजे गये। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस नैष्ठिक पुरुषार्थ को सराहा और अपनी ओर से भी सर्वे टीम भेजी।
• ‘नमामि गंगे’ अभियान के अंतर्गत जरूरतमंद लोगों के घर शौचालय बनवाने व अन्य आवश्यक कार्यों को पूरा करने का आश्वासन दिया।

जमालपुर, मुंगेर (बिहार)
नवम्बर- दिसम्बर में जमालपुर के समर्पित कार्यकर्त्ता डॉ. रामानन्द प्रसाद सिंह की टोली ने २० कि.मी. क्षेत्र में घर- घर संपर्क अभियान चलाकर निर्मल गंगा जन अभियान की शुरुआत की थी। पिछले एक वर्ष में इसके शानदार परिणाम उभरे, जिनकी जानकारी केन्द्र सरकार, जिला अधिकारी और मुख्य अभियंता को भी भेजी गयी। गायत्री परिवार द्वारा किये गये कार्य एवं सर्वेक्षण को संज्ञान में लेते हुए सरकार ने भी अपने ‘नमामि गंगे’ अभियान के अन्तर्गत इस क्षेत्र के सभी गाँवों में जरूरतमंदों के घर शौचालय बनवाने, कपड़े व बर्तन धोने के लिए उचित व्यवस्था और गंदे पानी का प्रबंधन करने का आश्वासन दिया है।

अभियान के आरंभ में जमालपुर शाखा ने श्रीमती किरन कुमारी सिन्हा के नेतृत्व में ३५- ४० बहिनों का ‘ऋतंभरा महिला मण्डल’ एवं डॉ. रामानंद प्रसाद सिंह के नेतृत्व में भाइयों का ‘युगऋषि प्रज्ञा मण्डल’ बनाया। उन सभी ने मिलकर लगातार छः माह तक सक्रिय रहते हुए गंगा की २० कि.मी. लम्बाई में एक- एक कि.मी. दोनों ओर के सभी गाँवों के हर घर से संपर्क किया। प्रत्येक गाँव में गंगा की कथा- व्यथा के कार्यक्रम हुए। ४० गाँवों के ५००० घरों से संपर्क हुआ। प्रत्येक घर में पाँच पवित्र द्रव्य (गंगाजल, अक्षत, रोली, प्रसाद और गंगा को स्वच्छ रखने के लिए संकल्प सूत्र) स्थापित किये गये। प्रत्येक गाँव में गंगा सेवा मण्डलों की स्थापना की गयी।

लक्ष्य मात्र प्रचार नहीं, सुनिश्चित परिवर्तन था। जाति, वर्ग, धर्म की संकीर्णताओं से उठकर मानवमात्र से गंगा को स्वच्छ रखने का आह्वान किया गया। इस जनमंथन के सार्थक परिणाम उभरे, लगभग ४०० युवा केवल गंगा को स्वच्छ करने के लिए ही नहीं, बल्कि अपने पूरे गाँव का आदर्श विकास करने के लिए सक्रिय हो गये। उनके सहयोग से गाँव की परिस्थिति और जरूरतों का सर्वेक्षण किया गया। जरूरतमंद लोगों के घरों में शौचालय न होने जैसे गंदगी के कारणों को प्रशासन और परस्पर सहयोग से दूर करने की पहल की गयी, आश्वासन दिया गया। गाँववासियों ने ऐसा हो जाने पर खुले में शौच न जाने और गंगा को गंदा न होने देने का संकल्प बड़ी प्रसन्नता के साथ लिया।

गायत्री परिवार के सर्वेक्षण और सुधारात्मक कार्यों के प्रति प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी प्रसन्नता व्यक्त की एवं सकारात्मक सक्रियता अपनायी। उन्होंने अपनी सर्वेक्षण टीम भी भेजी। ‘नमामि गंगे’ योजना में ही क्षेत्र की जरूरतों को शामिल कर उन्हें पूरा करने का आश्वासन दिया गया। कई टेलीविजन चैनलों ने भी क्षेत्र में ‘स्वच्छता अभियान’ के अंतर्गत चल रही गतिविधियों की जानकारी ली।
 
गाँव- गाँव स्थापित गंगा सेवा मण्डलों के माध्यम से इन सभी गाँवों के आदर्श विकास की प्रक्रिया तेजी से चल पड़ी है। गतवर्ष क्षेत्र में ५००० पौधे रोपे गये। इस वर्ष जिला वन अधिकारी के सहयोग से १००० पौधे लगाये जा रहे हैं। गाँव- गाँव में स्वच्छता के प्रति बढ़ती जागरूकता का प्रभाव दिखाई दे रहा है। बाल संस्कार शाला, शिक्षा, संस्कार, नशामुक्ति, स्वावलम्बन जैसे हर क्षेत्र में विकास की योजनाओं को गायत्री परिवार के सहयोग से गति मिल रही है।


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