देसंविवि ने गंगा तट में मनाया शिक्षक दिवस -आचरण से शिक्षा देने वाला शिक्षक सर्वोत्तम : डॉ. पण्ड्याजी

Published on 2016-09-05

जनजागरण रैली व विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम रहा गुरु को समर्पित

हरिद्वार ५ सितम्बर।
प्राचीन आरण्यक परंपरानुसार संचालित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज में भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली  राधाकृष्णन को याद करते हुए गंगा तट पर शिक्षक दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर उन्होंने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए उनकी शिक्षाओं को याद किया। विवि के सभी आचार्यों को विद्यार्थियों ने गुलदस्ता भेंटकर अपनी सद्भावना व्यक्त की, तो वहीं देसंविवि के अभिभावक कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने सभी आचार्यों को अपने आचरण से शिक्षा देने की बात कही।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि कुलाधिपति डॉ पण्ड्या ने कहा कि बीएचयू में कुलपति रहते हुए डॉ. राधाकृष्णन गीता की कक्षाओं के माध्यम से अपने विद्यार्थियों को जीवन जीने की कला, जीवन का अनुशासन सीखाते थे। उसी का परिणाम था कि उनके विद्यार्थी श्रेष्ठतर कार्य कर पाये। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का व्यवसायीकरण हो चुका है। शिक्षक अपनी वास्तविक भूमिका से विमुख हो चुके हैं। परिणामतः रोजगारपरक शिक्षा के पीछे अंधी दौड़ में जीवन विद्या लुप्त हो गयी है। युवा वर्ग अपने आंतरिक प्रतिभा और सामर्थ्य को पहचानने में असमर्थ है। इसी उद्देश्य से देसंविवि के कुलपिता पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा प्रतिपादित जीवन विद्या की शिक्षा को आलोक केन्द्र में रखा गया।

इस अवसर पर गंगा के पावन तट में विद्यार्थियों ने लघु नाटिकाओं और नृत्य नाटिकाओं के माध्यम से प्राचीन गुरुओं की मार्मिक प्रस्तुतियों से सबको काफी प्रभावित किया। अंत में कुलाधिपति ने शिक्षकों को सम्मानित किया। इस अवसर पर कुलपति श्री शरद पारधी, प्रति कुलपति डॉ.चिन्मय पण्ड्या  सहित विश्वविद्यालय परिवार उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन गोपाल शर्मा ने किया।

वहीं गायत्री विद्यापीठ में शिक्षक दिवस पर सीनियर विद्यार्थी शिक्षकों की भूमिका में नजर आये। उन्होंने अपने जूनियर बच्चों के साथ अपने अनुभव बाँटे। विद्यापीठ में सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों ने शिक्षक की महान परंपरा को याद किया। इनमें डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के व्यक्तित्व एवं कृतित्वों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया था।


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