नारी स्वावलम्बन के लिए चेतना ग्राम संस्थान की क्रांतिकारी पहल

Published on 2000-00-00

१७ शिविर लगाये
१७८० महिलाओं को दिया प्रशिक्षण
४० से अधिक उद्योग सिखाये गये
१८ स्वयं सहायता समूह बने
१८० महिलाओं को मिल रहा है रोजगार

जयपुर (राजस्थान)
श्रद्धेया शैलजीजी की प्रेरणा और आशीर्वाद लेकर जयपुर निवासी श्रीमती विभा अग्रवाल ने नारी सशक्तीकरण की दिशा में कदम बढ़ाये तो कमाल कर दिया। उनके द्वारा संचालित चेतना ग्राम संस्थान ने अब तक १७ स्वावलम्बन प्रशिक्षण शिविर लगाये, जिनसे गरीब, जरूरतमंद परिवारों की १७८० महिलाएँ लाभान्वित हुई हैं।

ये शिविर सांगानेर, शक्तिपीठ ब्रह्मपुरी, मानसरोवर, वैशाली नगर, घाट गेट, बसंत विहार, बनीपार्क, गाँधीनगर, मनोहरपुरा, जगतपुरा, गूजर की थड़ी, कठपुतली नगर, बिन्दायका आदि स्थानों पर लगाये गये। शिविर में शामिल होने वाली बहिनों की संख्या २५ से ९८ तक रही। पिंजरापोल व बनीपार्क स्कूलों में भी शिविर लगाये, जिनमें क्रमशः ६०० और १२० छात्राओं ने लाभ लिया। इनमें सिलाई, संगीत, संस्कार, स्वावलम्बन की शिक्षा दी गयी।

प्रयास सार्थक सिद्ध हो रहे हैं। प्रशिक्षित बहिनों के १८ स्वयं सहायता समूह तैयार हो गये हैं, जिनके माध्यम से १८० बहिनों को रोजगार दिया जा रहा है। इन समूहों को सिलाई मशीनें दी गयी हैं। अधिकतर बहिनें गरीब हैं। वे सब एक फैक्टरी में सिलाई- कढ़ाई के अलावा गत्ते के बैग, मार्बल पेण्टिंग, राखी, थैली, पोटली, अचार, जैम आदि ४० प्रकार की वस्तुएँ बना रही हैं। उन्हें इसका मेहनताना दिया जाता है। श्रीमती चौधरी के मार्गदर्शन में काम कर रही सांगानेर के एक स्वयं सहायता समूह ‘ऊर्जा’ की ३० बहिनें हवन के छोटे किट तैयार करने में जुटी हैं। प्रशिक्षित बहिनों के माध्यम से पंजाब, जयपुर और मुम्बई के कई घरों में विभिन्न प्रकार के कुटीर उद्योग प्रारंभ हो गये हैं। पिछले दिनों चेतना ग्राम संस्थान द्वारा उनके द्वारा निर्मित स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाये गये सामानों की प्रदर्शनी लगायी। लागों ने इन सामानों को खूब पसंद किया और खरीदा। इन सामानों की बिक्री से ही संस्थान की गतिविधियाँ आगे बढ़ती जा रही हैं। यहाँ साहित्य भी खूब बिका।

चेतना ग्राम संस्थान के प्रयास बहुमुखी हैं। उन्होंने कच्ची बस्तियों में प्रौढ़ शिक्षा की कक्षाएँ चला रखी हैं। एक युवा टीम का गठन किया गया है, जिसके माध्यम से एक सेंटर में ३०० बच्चों को शिक्षा, संस्कार देने व स्वावलम्बी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। यह केन्द्र बच्चों के साथ- साथ उनके अभिभावकों को भी मिशन से जोड़ने का प्रयास करेगा, उन्हें रोजगार भी दिलायेगा।

श्रीमती विभा अग्रवाल अपने भामाशाही योगदान से मिशन को सींचने वाले जयपुर के सुपरिचित कार्यकर्त्ता श्री वीरेन्द्र अग्रवाल जी की पुत्रवधु हैं। श्रद्धेया जीजी से ३०,००० महिलाओं को स्वावलम्बी बनाने की प्रेरणा और आशीर्वाद मिलने के बाद से उन्होंने अपने आप को पूरी तरह से इसी कार्य के लिए समर्पित कर दिया। जयपुर की अन्य वरिष्ठ बहिनों- जया, मीनाक्षी, गायत्री, स्वाती, सीता जी, पृथ्वी जी, श्रीमती चौधरी, श्रीमती चौहान आदि का उन्हें पूरा- पूरा सहयोग मिला। परिणाम स्वरूप वे अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। ३००० बहिनें उनके स्वावलम्बन अभियान से जुड़ चुकी हैं।

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