Published on 2016-10-02

शांतिकुंज में सामूहिक नवरात्र साधना प्रारंभ, देसंविवि ने किया अनूठा प्रयोग
हरिद्वार, ०१ अक्टूबर।

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में युवाओं ने सामूहिक नवरात्र साधना का एक अनूठा नमूना पेश किया है।  प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी के नेतृत्व में छात्र-छात्राओं ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ आध्यात्मिक विकास के लिए सामूहिक यज्ञ एवं साधना में जुटे हैं। विद्यार्थियों का मानना है कि पढ़ाई से भौतिक जगत का ज्ञान होता है तो वहीं नवरात्र जप-साधना से आत्मिक प्रगति के द्वार खुलते हैं। विद्यार्थियों के शैक्षणिक व आध्यात्मिक विकास के लिए कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी नियमित रूप से गीता व ध्यान की विशेष कक्षाएँ लेते हैं।

देसंविवि के मृत्युंजय सभागार में नवरात्र साधना के प्रथम दिन डॉ. पण्ड्याजी ने नवरात्र को शक्ति की उपासना का महापर्व बताते हुए साधना काल में दिनचर्या एवं जप-साधना की विधि विस्तार से बताई। उन्होंने गीता के विभिन्न श्लोकों के माध्यम से मानव जीवन के विकास के सूत्र समझाया।

उधर गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में देश के कोने-कोने से आये साधकों का नवरात्र का प्रथम दिन ध्यान-साधना से शुरु हुआ। प्रातःकालीन सत्संग में शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्त्ता डॉ. ओपी शर्माजी ने साधना से सफलता विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एकाग्रचित्त होकर किये गये कार्य में सफलता अवश्य मिलती है। तीर्थ में किया जप, साधना व कर्म का फल अन्य स्थानों की तुलना में दस गुना होकर होता है। इस अवसर पर देश-विदेश से आये गायत्री साधक एवं शांतिकुंज के अंतेवासी कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे।


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