Published on 2016-12-23

मुन्नालाल एवं जयनारायण खेमका गर्ल्स कॉलेज, सहारनपुर के स्वर्ण जयंती समारोह में दिया संदेश

सुविख्यात् संस्कृत श्लोक- विद्या ददाति विनयमं... आज ‘विद्या ददाति धनं- सुखम्’ रह गया है, लेकिन गीता कहती है- अशांतस्य कुतः सुखम्?

सहारनपुर क्षेत्र के इस प्रतिष्ठित महाविद्यालय के संस्थापक द्वय श्री मुन्नालाल जी एवं श्री जयनारायण जी खेमका की सोच और सामाजिक सेवाएँ सराहनीय हैं, जिन्होंने ५० वर्ष पूर्व नारी शिक्षा को विशेष महत्त्व दिया, इस महाविद्यालय की स्थापना की। शिक्षा ही समाज के परिवर्तन की रीढ़ है, नारी के सुविचार और संस्कारों का प्रभाव उसके परिवार, बच्चे और समाज पर पड़ता है। वह चाहे तो अपने पूरे समाज को बदल सकती है।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी के इन विचारों ने वर्तमान समय की शिक्षा व्यवस्था को विद्यान्मुखी बनाने का संदेश दिया। वे १४ दिसम्बर को मुन्नालाल एवं जयनारायण खेमका गर्ल्स कॉलेज, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह के विशिष्ट अतिथि डॉ. वाई विमला डीन विज्ञान संकाय एवं वि.वि. प्रवेश प्रभारी- चौधरी चरण सिंह विवि. मेरठ एवं प्रो. जे.एस. नेगी क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी मेरठ, महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. मधु जैन व श्री दिग्विजय गुप्ता सचिव सहित सैकड़ों शिक्षाविद, शिक्षक, छात्राएँ समारोह में उपस्थित थे।

आद.डॉ. साहब ने कहा कि सुविख्यात् संस्कृत श्लोक- विद्या ददाति विनयमं... आज ‘विद्या ददाति धनं- सुखम्’ रह गया है, लेकिन गीता कहती है- अशांतस्य कुतः सुखम्? हम देख रहे हैं कि वर्तमान शिक्षा धन तो देती है, लेकिन शांति- संतोष नहीं है। सुख चाहिए तो उस विद्या को वरीयता देनी होगी जो व्यक्ति को गुणवान- संस्कारवान बनाती है।

कुलाधिपति जी ने देव संस्कृति विवि. की विशेषताओं से सभा को अवगत कराया और प्राचीन गुरुकुल परम्परा तथा आधुनिक शिक्षा के समन्वय का आदर्श देखने के लिए वहाँ के विद्यार्थियों और शिक्षाविदों को विशेष रूप से आमंत्रित किया।

महाविद्यालय की ओर से प्राचार्या डॉ. मधु जैन ने आदरणीय डॉ. साहब एवं अन्य अतिथियों का भावभरा स्वागत- सम्मान किया। वहाँ की छात्राओं ने अत्यंत मनोरम सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये। कॉलेज की पाँच दशक की यात्रा पर एक चित्र प्रदर्शनी भी लगायी गयी थी। हरिद्वार के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रजनीकांत शुक्ला ने इस कार्यक्रम को प्रेरणादायी बनाने में विशेष योगदान दिया।


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