Published on 2016-12-17

‘दैनंदिन जीवन में गीता’ विषय पर दिव्य भारत संघ (दिया) मुम्बई का वार्षिक सम्मेलन
दिया, मुम्बई की अभिनव योजना

दिया, मुम्बई के सदस्य, सैकड़ों समर्पित युवा हर वर्ष अलग- अलग विषयों को आधार बनाकर विचार क्रांति अभियान को गति देते रहे हैं। हर वर्ष के अभियान का शुभारंभ एक बृहद् सम्मेलन के साथ होता है। इस वर्ष का विषय चुना गया है- ‘दैनंदिन जीवन में गीता’। दिया द्वारा पूरे वर्ष सेमीनार, यज्ञ, दीपयज्ञ, शिविर आदि के कार्यक्रमों के द्वारा इसी विषय को आधार बनाकर परम पूज्य गुरुदेव के युग निर्माणी सूत्रों को जनजीवन में प्रतिष्ठित करने के प्रयास किये जायेंगे।

वर्ष- २०१७ के अभियान का शुभारंभ दादर, मुम्बई के योगी सभागृह में १७ दिसम्बर को आयोजित बृहद् सम्मेलन के साथ हुआ। आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी इसके मुख्य वक्ता तथा विशिष्ट अतिथि स्वामिनी विमलानन्दा, चिन्मय मिशन और बहन शिवानी, प्रजापिता ब्रह्मकुमारी थे।

कार्यक्रम के आरंभ में अखिल विश्व गायत्री परिवार की संक्षिप्त जानकारी देने वाली डॉक्यूमेण्ट्री दिखाई गयी। तत्पश्चात् भाभा एटोमिक रिसर्च सेण्टर, मुम्बई में गायत्री परिवार द्वारा चलायी जा रही बाल संस्कार शाला के बच्चों ने अपनी मधुर लालित्यपूर्ण वाणी में गीता के श्लोकों का उच्चारण किया।

सेमीनार का औपचारिक शुभारंभ आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी के साथ स्वामिनी विमलानंदा- चिन्मय मिशन एवं ब्रह्मकुमारी बहन शिवानी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। गायत्री परिवार मुम्बई के वरिष्ठ कार्यकर्त्ता श्री मनुभाई एवं कई अन्य लोगों ने मंचासीन अतिथिगणों का भावभरा स्वागत किया। शांतिकुंज के युग गायकों की टोली ने ‘‘आप हैं गुरुरूप भगवन, आप ही दिनमान हैं....’’ गीत प्रस्तुत किया।

सभा के अंत में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों की टीम ने एक मार्मिक नाटिका प्र्रस्तुत की। कृष्ण, अर्जुन, धृतराष्ट्र, संजय एवं सूत्रधार समय के संवादों ने वर्तमान जीवन की समस्याओं को उकेरा और गीता के सूत्रों के माध्यम से उनके समाधान सुझाये।

अथक परिश्रम, सुनियोजित प्रयास
पूरा कार्यक्रम बड़ा ही सुनियोजित था। लगभग ३०० कार्यकर्त्ताओं ने पिछले चार माह के हर रविवार को इसकी तैयारियों में नियोजित किया। सज्जा, सुरक्षा, पंजीयन, मीडिया, जनसंपर्क, सज्जा, जलपान जैसे १६ विभागों की टीम तैयार की गयी। सर्वश्री जतीन दवे, दिनेश विजयवर्गीय, हितेश जोशी, सुजाता सोपारकर, शुचिता शेट्टी, डॉ. वरुण मानेक आदि के नेतृत्व में सभी कार्यकर्त्ताओं ने अपनी जिम्मेदारियाँ पूरी श्रद्धा- निष्ठापूर्वक निभाईं।

कार्यक्रम की सफलता में आईटी टीम का विशेष योगदान रहा। उनकी चौबीसों घंटे की अथक सक्रियता के कारण ऑनलाइन १३०० रजिस्ट्रेशन हुए। वैज्ञानिक, बैंकर्स, शिक्षाविद, प्रशासनिक अधिकारी, उद्यमी, बड़ी कम्पनियों के अधिकारी, जज, वकील, विद्यार्थी आदि हर वर्ग के लगभग २५०० लोगों ने इसका लाभ लिया।


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