वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस युग में सफलता के लिए आधुनिक तकनीक का ज्ञान आवश्यक है- आद. राज्यपाल डॉ. कृष्ण कांत

Published on 2017-04-14
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हरिद्वार, १५ अप्रैल।

उत्तराखण्ड के राज्यपाल डॉ० कृष्ण कांत पाल ने आज देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के पंचम दीक्षान्त समारोह में दीक्षा प्राप्त विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि जहाँ आपने जन्म लिया है, जहाँ आप पले- बढ़े और पढ़े हैं, उस क्षेत्र को अपनी कर्मभूमि तथा भविष्य के विकास का केन्द्र बनाना अपनी नैतिक जिम्मेदारी मानें। भारतवर्ष की सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखते हुए आधुनिकता को अपनायें। वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस युग में सफलता के लिए आधुनिक तकनीक का ज्ञान आवश्यक है। अपनी संस्कृति को मजबूत करते हुए आधुनिक ज्ञान और तकनीकी संयत्रक के रूप में राज्य की उन्नति के लिए अपनी सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करें। अच्छी पुस्तकों के अध्ययन की आदत के साथ ही नया सीखने की ललक और लगन को हमेशा जीवन्त रखें। इससे सकारात्मक सोच, रचनात्मक और वैचारिक शक्तियाँ मजबूत होती हैं। नवाचार या इनोवेशन की प्रेरणा मिलती है तथा किसी एक समस्या के अनेक समाधानों का मार्ग भी खुलता है।

उपाधि प्राप्त स्नातकों तथा स्वर्ण पदक विजेताओं को बधाई देते हुए राज्यपालजी ने कहा कि अब आपके जीवन का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है जिसमें चुनौतयाँ होंगी तो मान- प्रतिष्ठा के भी अनेक अवसर होंगे। भविष्य में आने वाली किसी भी विपरीत परिस्थिति को चुनौती के रूप में स्वीकार करें। मानवीय मूल्यों के आलोक में अपने ज्ञान, विवेक, कौशल से चुनौतियों का सामना करते हुए जीवन में सफलता की ओर बढ़ें। राज्यपालजी ने विश्वासपूर्वक कहा कि इस विश्वविद्यालय से शिक्षित तथा भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों से पोषित हो रही युवा पीढ़ी पूरे आत्मविश्वास से राष्ट्रनिर्माण में महत्त्वपूर्ण तथा सक्रिय भूमिका का निर्वहन करती रहेगी।

अपने सम्बोधन में राज्यपालजी ने आधुनिक तकनीकी ज्ञान को अपनाये जाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में प्रासंगिक रहने और सफल होने के लिए स्वयं को सदैव अद्यतन करते रहना होगा। उन्होंने कहा, रोजगार की तलाश करने की जगह रोजगार देने की स्थितियाँ बनाने के लिए साहस जुटाना चाहिए। राज्यपाल ने युवाओं में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना को आवश्यक बताते हुए कहा कि जीवन में प्रगति के लिए प्रतिस्पर्धा की भावना जरूरी है लेकिन उसमें अनुचित व अनैतिक तरीकों का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्वमूल्यांकन की क्षमता बढ़ाकर अपने भीतर की कमियों को पहचानने और उसे दूर करने की कोशिश करने के लिए भी युवाओं को प्रेरित किया।

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