मेरी प्रेरणा का स्रोत है अध्यात्म : आदरणीय श्री कैलाश सत्यार्थी

Published on 2017-04-15

हरिद्वार १५ अप्रैल।

देसंविवि के पाँचवें दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि श्री कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि मेरी प्रेरणा अध्यात्म है। मेरे आने का कारण भी यही रहा कि यह विश्वविद्यालय सम्पूर्ण समाज को आध्यात्मिक करने का प्रयत्न कर रहा है। इस दीक्षांत समारोह के माध्यम से पंचामृत लेकर जा रहे हैं। पंचामृत में अध्यात्म, विज्ञान, शिक्षा, संस्कार और सेवा सम्मिलित है। यह पंचामृत आज के दौर में कम ही विश्वविद्यालय देते हैं। इस विश्वविद्यालय का परिसर विद्या और शिक्षा की सुगन्ध से भरा हुआ है। श्री सत्यार्थी ने कहा कि आज का दिन माता- पिता और गुरु जनों को कृतज्ञता समर्पित करने का दिन है। कहा कि आप जहां भी जाएं इस शिक्षा और विद्या के संगम को समाज में फैलाने का कार्य करते रहें। आपका कार्य ऐसा हो, जो देश के विकास का भागीदार बन सके।


संस्कृति के संवाहक के रूप में विद्यार्थी तैयार करने वाला है देसंविवि : श्री शरद पारधीजी

देसंविवि के कुलपति श्री शरद पारधीजी ने कहा कि सन् २००२ में स्थापित विवि लगभग १०० विद्यार्थियों एवं चार संकायों से शुरू हुआ था, जो आज १० बड़े विभाग, १८ उप विभाग एवं ५८ पाठ्यक्रमों के साथ दृढ़ता से खड़ा है। पिछले १५ वर्षों में १५० से अधिक पी.एच. डी. उपाधि प्रदान कर देश- विदेश में शोध कार्यों को नई दिशाधारा दे रहा है।

उन्होंने कहा कि ज्ञानदीक्षा एक अनूठा संस्कार देवसंस्कृति विश्वविद्यालय की विशेषता रही है। भावी स्नातकों, परास्नातकों को ज्ञान साधना के उद्देश्य से, वेदमंत्रों की साक्षी में संकल्प सूत्रों में बाँधना, गुरु- शिष्य परम्परा का द्योतक है। विवि में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की अनूठी के अंतर्गत उन्नयन, उत्सव, उत्कर्ष व अभ्युदय कार्यक्रम के माध्यम से छात्र- छात्राओं का चहुँमुखी विकास किये जाते हैं। कुलपति ने विवि की राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त उपाधियों की चर्चा की। कुलपति ने कहा कि विवि में मुख्य विषयों के पठन- पाठन के साथ- साथ जीवन प्रबन्धन तथा अध्यात्म और विज्ञान के समन्वय से वैज्ञानिक अध्यात्मवाद जैसे विषयों के माध्यम से व्यक्तित्व विकास को पूर्ण विकसित करने का प्रयास हो रहा है।

प्रतिकुलपति डा. चिन्मय पण्डयाजी ने दीक्षांत समारोह की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि यह अद्वितीय विश्वविद्यालय है, जिसके कण- कण में भारतीय संस्कृति का वास है। यह दीक्षांत कोई डिग्री बांटने का समारोह नहीं है, यह पूर्वमिलन का समावर्तन समारोह है जिसमें आपको एक बार फिर से याद दिलाया जाता है कि आप उस विश्वविद्यालय के दीक्षांत विधार्थी हैं जहां प्रेम, सद्भावना और दूसरों की सहायता करने के लिए हर क्षण तत्पर रहते हैं।

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