अनूठा प्रयोग करने वाला है देसंविवि : आदरणीय डॉ. प्रणव पण्ड्याजी

Published on 2017-04-15

हरिद्वार : १५ अप्रैल।

देसंविवि के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि जीवन विद्या के आलोक केन्द्र एवं ज्ञान- विज्ञान के प्रकाशस्तंभ के रूप में इस विश्वविद्यालय का सृजन युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के दिव्य संकल्प से हुआ है। यह विवि शिक्षा के क्षेत्र में एक अभिनव प्रयोग है। जहाँ मूल्य आधारित शिक्षा, वैज्ञानिक अध्यात्मवाद, जीवन प्रबंधन, शिक्षा के साथ विद्या, दीक्षान्त के साथ दीक्षारंभ, प्राच्य व आधुनिक शिक्षा एवं उन्नयन आदि पाठ्यक्रमों एवं कार्यक्रमों के रूप में शिक्षा जगत को नये प्रयोग प्रदान करने का माध्यम बन चुका है।

देसंविवि के पंचम दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने हुए कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे हों, जो मात्र डिग्रियाँ बाँटने का हाट बाजार न होकर सच्चे मनुष्य, बड़े मनुष्य, महान मनुष्य और सर्वांगपूर्ण मनुष्य बनाने की आवश्यकता को पूर्ण कर सके। जहाँ के ऊर्जावान आचार्य व प्राणवान विद्यार्थी मिलकर प्राणऊर्जा का ऐसा प्रवाह पैदा कर सकें जिससे पूरे देश के प्राण लहलहा उठें व सारी धरती पर जीवन- मूल्यों के वरदान बरसने लगें। जहाँ शिक्षा ही नहीं, संस्कारों का भी अर्जन- उपार्जन हो सके। कहा कि यहाँ विद्यार्थियों को उनके विषय की सामाजिक उपयोगिता का बोध कराने के साथ ही उनके अंदर सामाजिक दायित्व की भावना का विकास भी करती है। यहाँ के प्रत्येक पाठ्यक्रम के साथ जीवन प्रबंधन का अनिवार्य शिक्षण- जीवन जीने की कला और कुशलता का नियमित प्रशिक्षण प्रदान करता है। विश्वविद्यालय का योग विभाग, भारतीय मनोविज्ञान, पत्रकारिता, पर्यटन प्रबंधन सहित विभिन्न विभागों की विस्तार से जानकारी दी।

देसंविवि के कुलाधिपति डॉ. पण्ड्याजी ने कहा कि विश्वविद्यालय ने जो आपको शिक्षा के साथ संस्कार व जीवन की गुणवत्ता दी है, उसे आप जहाँ भी जायें, उस क्षेत्र को अपने व्यक्तित्व से प्रकाशित करें। आप जितना खरे उतरेंगे, उतना ही हम सब गौरवान्वित होंगे। आप सब स्नातक, परास्नातक होकर अपने जीवन समर में कर्मयोग व कर्तव्य के कुरुक्षेत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं। कहा कि अपने कर्तव्यपथ पर अनवरत अग्रसर होते रहें व योगः कर्मसु कौशलम्, समत्वं योग उच्यते एवं करिष्ये वचनं तव जैसे गीता के अमृतसूत्रों को सदैव हृदय में धारण किए रहें।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री कैलाश सत्यार्थी और राज्यपाल डॉ पॉल व डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने विश्वविद्यालय के समाचार पत्र 'संस्कृति संचार', 'संस्कृति मंजूषा', 'ज्ञान प्रवाह और रैनांसा का विमोचन किया। कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने मुख्य अतिथि और राज्यपाल को स्मृति चिन्ह और शॉल देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर शांतिकुंज संरक्षिका शैल जीजी, व्यवस्थापक श्री गौरीशंकर शर्माजी, देसंविवि के कुलसचिव श्री संदीप कुमारजी, विवि परिवार, समस्त नूतन और पूर्व छात्र तथा देश- विदेश से आए अतिथिगण उपस्थित रहे।


दीक्षान्त समारोह में बाँटी उपाधियाँ
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रो० डेविड फोर्ड को डी लिट् तथा डॉ. इनिया त्रिंकुनिने (लिथुआनिया) को पी.एच.डी की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। विवि स्तर पर २०१३ के लिए संगु पावनी, २०१४ के लिए प्रज्ञा सिंह, २०१५ के लिए श्रद्धा खरे तथा २०१६ में स्मृति श्रीवास्तव को गोल्ड मेडल प्रदान किये गये। साथ ही विभिन्न विषयों में प्रथम स्थान प्राप्त ४६ विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किये गये। पी.एच. डी, स्नातकोत्तर- ४७३, स्नातक- ५४०, डिप्लोमा- १०८, पी.जी. डिप्लोमा- ६४ एवं प्रमाण- पत्र इत्यादि विभिन्न उपाधियाँ प्रदान की गयीं।

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