img


संकल्प का अपना विज्ञान है। उसे कर्म का बीजारोपण कह सकते हैं। संकल्प की चरणबद्ध रूपरेखा बनाई जाती है। इसमें सोच विचार कर निश्चय किये जाते हैं। निश्चय को मन में छिपाकर नहीं रखा जाता है, वरन् प्रकट किया जाता है। उसकी क्रमबद्ध योजना बनाई जाती है। तत्परतापूर्वक और तन्मयतापूर्वक मन लगाने के लिए साहस जुटाया जाता है। साधन एवं सहयोग एकत्रित करने का ताना- बाना बुना जाता है और उसके लिए समुचित दौड़- धूप की जाती है। कठिनाइयाँ आ सकती हैं और उनका सामना अथवा समाधान करने के लिए पहले से ही क्या तैयारी रखी जा सकती है, इन सब प्रश्रों पर गंभीरता एवं दूरदर्शिता के साथ विचार किया जाता है। जानकारों के साथ परामर्श किया जाता है। सामयिक परिवर्तनों की गुंजाइश रहती है। ऐसे सुनिश्चित प्रयत्नों को संकल्प कहते हैं। 
      संकल्प और असंकल्प का अन्तर समझने वालों को असफलता से बचने और सफलता के लक्ष्य तक पहुँचने में विशेष कठिनाई नहीं होती। संकल्पवान् हर परिस्थिति का सामना करने के लिए साहस उभारते हैं। आंतरिक और परिस्थितिजन्य अवरोधों से जूझने का पराक्रम करते हैं। फलतः: असमंजस हटता है और पुरुषार्थ की गतिशीलता प्रखर होती चली जाती है। लक्ष्य तक पहुँचने का यही राजमार्ग है। 
      श्रेष्ठता की साधना संकल्प से ही संभव होती है। संकल्प को ही व्रत कहते हैं। व्रतधारी ही तपस्वी और मनस्वी कहलाते हैं। लक्ष्य की ओर शब्दवेधी बाण की तरह सनसनाते हुए चल पडऩे की क्षमता उन्हीं में होती है। संकल्प का कार्य है- अमुक कार्य करने का अमुक लक्ष्य तक पहुँचने का दृढ़ निश्चय। दृढ़ निश्चय का अर्थ है- काम करने की सुव्यवस्थित योजना बनाना, उसके लिए समुचित श्रम, साधना और मनोयोग लगाने की प्रतिज्ञा। प्रतिज्ञा का अर्थ है- आत्म गौरव को दाँव पर लगा देना, प्रयास को चरम पुरुषार्थ के साथ पूरा करना। मनःसंस्थान की संरचना कर सकना संकल्प का ही काम है। इसी से कहा जाता है कि संकल्प कभी अधूरे नहीं रहते। 
संकल्प को जड़ और सफलता को तना कहा जा सकता है। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए तत्त्ववेत्ताओं ने व्रतशील संकल्प के निर्धारण के कार्य को आधी सफलता माना है। यह मान्यता अक्षरशः: सत्य है, जिसे संदेह हो वह इस सच्चाई की परीक्षा स्वयं करके देख सकता है। 
      सृष्टि का प्रादुर्भाव भी प्रजापति ब्रह्मा की संकल्पशक्ति के द्वारा ही हुआ है। जागरूकता पुरुषार्थ का प्रथम संकल्प है। हममें से प्रत्येक को कुछ सृजनात्मक संकल्प करना चाहिए। अब हमें जागरूक होने की आवश्यकता है। मनगढंत हवाई उड़ानें भरते रहने से हम कहीं के न रहेंगे। कहा भी गया है- ख्वाब कभी पूरे नहीं होते, संकल्प कभी अधूरे नहीं रहते। 
      संकल्प शक्ति के प्रचण्ड सामर्थ्य के संदर्भ में इतिहास इस बात का साक्षी है कि कितने ही व्रतशील उच्च आदर्शों को लेकर कार्य क्षेत्र में उतरे और तुच्छ सामर्थ्य के रहते हुए भी महान् कार्य करने में सफल हुए हैं। भगवान् ने मनुष्य को जहाँ अन्य प्राणियों की तुलना में अनेकों शारीरिक- मानसिक विशेषताएँ प्रदान की हैं, वहाँ एक और विलक्षण अनुदान भी दिया है, जिसका नाम है संकल्प बल। इसकी सामर्थ्य का कोई पारावार नहीं है। संकल्प बल ही है, जो सन्मार्ग पर चल पड़े, तो व्यक्तित्व को इतना ऊँचा उठा सकता है, जिस पर देवता भी ईर्ष्या करने लगें। नर हो या नारी, बालक हो या वृद्ध, स्वस्थ हो या रुग्ण, धनी हो या निर्धन, परिस्थितियों से कुछ बनता- बिगड़ता नहीं। प्रश्र संकल्प शक्ति का है। मनस्वी व्यक्ति अपने लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ बनाते और सफल होते हैं। समय कितना लगा और श्रम कितना पड़ा, उसमें अंतर हो सकता है, पर आत्म निर्माण के लिए प्रयत्नशील व्यक्ति अपनी आकांक्षा को सक्रियता एवं प्रखरता के अनुरूप देर- सबेर में सफल करके ही रहता है। यदि मनुष्य अपनी साहसिकता को जगा लें, संकल्प शक्ति का सदुद्देश्य के लिए उपयोग करने लगे, तो कोई कारण नहीं कि वह अपनी गौरव- गरिमा का सिक्का जमाने में किसी से पीछे रहे। 


Write Your Comments Here:


img

त्रिविध दु:खों का निवारण पं० श्रीराम शर्मा आचार्य

समस्त दु:खों के कारण तीन हैं- अज्ञान, अशक्ति और अभाव। इन तीनों कारणों को जो जिस सीमा तक अपने आपसे दूर करने में समर्थ होगा, वह उतना ही सुखी बन सकेगा। अज्ञान के कारण मनुष्य का दृष्टिकोण दूषित हो जाता.....

img

उच्च मानसिकता के चार सूत्र पं० श्रीराम शर्मा आचार्य

व्यवहार की धर्मधारणा और सेवा-साधना सद्गुणों के जीवन में उतारने भर से बन पड़ती है। इसके अतिरिक्त दूसरा क्षेत्र मानसिकता का रह जाता है। उसमें चरित्र और भावनात्मक विशेषताओं का समावेश किया जा सके, तो समझना चाहिए लोक-परलोक दोनों को.....

img

उचित- अनुचित की कसौटी पं० श्रीराम शर्मा आचार्य

उचित-अनुचित का निष्कर्ष निकालने और किधर चलना है, किधर नहीं इसका निर्णय करने की उपयुक्त बुद्धि भगवान ने मनुष्य को दी है। उसी आधार पर उसकी गतिविधियाँ चलती भी हैं पर देखा यह जाता है कि दैनिक जीवन की साधारण.....