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जो औरों के काम आयें

समय की माँग के अनुरूप दो दबाव इन दिनों निरंतर बढ़ते जा रहे हैं। एक व्यापक अवांछनीयताओं से जूझना और उन्हें.....

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नवनिर्माण करती देवसंस्कृति पं० श्रीराम शर्मा आचार्य

देवसंस्कृति आदिकाल से ही समूचे विश्व के हर क्षेत्र एवं समुदाय को सद्भावनाओं और सत्प्रवृत्तियों से अनुप्राणित करने में समर्थ रही है। यदि विश्व को आज की परिस्थितियों में एक सूत्र में बांधने की बात सोची जाए, तो एक ही.....

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नीति रहित भौतिकवाद से उपजी दुर्गति पं० श्रीराम शर्मा आचार्य

ऊँचा महल खड़ा करने के लिए किसी दूसरी जगह गड्ढे बनाने पड़ते हैं। मिट्टी, पत्थर, चूना आदि जमीन को खोदकर ही निकाला जाता है। एक जगह टीला बनता है तो दूसरी जगह खाई बनती है। संसार में दरिद्रों, अशिक्षितों, दु:खियों,.....