img


भा.सं.ज्ञा.प. के चतुर्थ चरण में उ.प्र. व उत्तराखंड के शिक्षकों का समागम

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्याजी ने कहा कि सद्ज्ञान के अधिकाधिक उपार्जन से ही मनुष्य का जीवन ऊँचा उठ सकता है। ज्ञान वही सार्थक है, जिससे व्यक्तित्व निखरता हो। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति अंतर्जगत में सद्गुणों की खेती करती है। भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था व विश्वास से ही ईश्वर की कृपा मिलती है।

डॉ. पण्ड्याजी शांतिकुंज के भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय शिक्षक गरिमा शिविर के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस शिविर में उप्रउत्तराखंड के विभिन्न जनपदों के शिक्षक- शिक्षिकाएँ सम्मिलित हैं। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि शिक्षकों को चाहिए कि वे संस्कृतिनिष्ठ हों और अपने विद्यार्थियों में शिक्षा अर्थात् किताबी ज्ञान के साथ विद्या अर्थात् जीवन जीने की कला को जीवन में धारण करने के लिए प्रेरित करें, क्योंकि विद्यार्थी ही देश के भावी कर्णधार हैं। गीता के मर्मज्ञ डॉ पण्ड्या ने गीता, उपनिषद् आदि ग्रंथों का उद्धरण देते हुए विद्या की सार्थकता पर विस्तार से जानकारी दी।

इस अवसर पर डॉ. पण्ड्याजी ने उप्र में सबसे ज्यादा विद्यार्थियों की भागीदारी कराने के लिए कानपुर के जिला संयोजकों वीआर गुप्ता, अंगद सिंह आदि को विशेष स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। भारतीय संस्कृति ज्ञान प्रकोष्ठ के डॉ. पीडी गुप्ता के अनुसार गायत्री तीर्थ शांतिकुंज ने विद्यार्थियों में संस्कृति के प्रति रुझान पैदा करने के लिए भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के माध्यम से एक विशेष मुहिम चलाई है, इसके माध्यम विद्यालय, उच्च विद्यालय एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को प्राचीन भारतीय संस्कृति से लेकर ऋषियों, साधु- संतों सहित महापुरुषों की जीवनियों समेटे साहित्य को पढ़ने के लिए प्रेरित किये जाते हैं। साथ स्थान- स्थान पर बने संस्कृति मंडल के माध्यम से सद्गुणों को जीवन में उतारने के प्रोत्साहित किया जाता है। प्रथम सत्र का संचालन अतुल द्विवेदी ने किया।

तीन दिन तक चलने वाले इस शिविर में उप्रउत्तराखंड के विद्यार्थियों के नवनिर्माण में सहायक भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के भावी कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की जायेगी। इस अवसर पर सूरज प्रसाद शुक्ल, रामनरेश सिंह, पीडी थपरियाल, मोहन सिंह भदौरिया, राजेश मिश्रा आदि उपस्थित थे।


Write Your Comments Here:


img

भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का रजत जयंती वर्ष

नई पीढ़ी को संस्कृतिनिष्ठ-व्यसनमुक्त बनाने हेतु ठोस प्रयास होंसोद्देश्य प्रारंभ और प्रगतिभारतीय संस्कृति को दुनियाँ भर के श्रेष्ठ विचारकों ने अति पुरातन और महान माना है। ऋषियों की दृष्टि हमेशा से विश्व बंधुत्व की रही है। इसी लिए इस संस्कृति.....

img

२०० लिथुआनियाई करते हैं नियमित यज्ञ

११ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ की संभावनाएँ बनीं, शाखा भी स्थापित होगी

लिथुआनिया आयुर्वेद अकादमी द्वारा प्रज्ञायोग, यज्ञ जैसे विषयों पर लिथुआनिया आयुर्वेद अकादमी द्वारा एक बृहद् वार्ता रखी गयी थी। लगभग १५० लोगों ने इसमें भाग लिया। डॉ. चिन्मय जी ने.....

img

इंडोनेशिया और देव संस्कृति विश्वविद्यालय के बीच शिक्षा एवं सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग के लिए हुआ अनुबंध

इंडोनेशिया के धार्मिक मंत्रालय के हिन्दू निदेशालय ने भारतीय संस्कृति एवं वैदिक परम्पराओं के अध्ययन-अध्यापन हेतु देव संस्कृति विश्वविद्यालय के साथ अनुबंध किया है। देसंविवि प्रवास पर आये इंडोनेशियाई मंत्रालय के निदेशक श्री कटुत विद्वन्य और देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ......


Warning: Unknown: write failed: No space left on device (28) in Unknown on line 0

Warning: Unknown: Failed to write session data (files). Please verify that the current setting of session.save_path is correct (/var/lib/php/sessions) in Unknown on line 0