मनुष्य को मनुष्य होने की पहचान कराते हैं शिक्षक- डॉ.प्रणव पण्ड्या 

शिक्षक अपने लिए ही नहीं कमाता: जिलाधिकारी 

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ.प्रणव पण्ड्या ने शिक्षक दिवस के उपलक्ष पर आयोजित समारोह में कहा कि गुरु अपने शिष्यों के जीवन में कायाकल्प करने की सामर्थ्य रखते हैं। डॉ. सर्वपल्ली राधाकष्ष्णन् का जीवन चरित आज के शिक्षकों के लिए एक अतुलनीय मिसाल है। 

मृत्युंजय सभागार में उपस्थित शिक्षकों और छात्र- छात्राओं को सम्बोधित करते हुए डॉ. पण्ड्या ने कहा कि शिक्षक की महिमा अवर्णनीय है। वर्तमान समय में शिक्षा का व्यवसायीकरण हो चुका है। शिक्षक अपनी वास्तविक भूमिका से विमुख हो चुके हैं। परिणामतः रोजगारपरक शिक्षा के पीछे अंधदौड़ में जीवन विद्या लुप्त हो गई है। युवा  वर्ग अपने आंतरिक प्रतिभा और सामर्थ्य को पहचानने में असमर्थ है। इसी उद्देश्य से देसंविवि में कुलपिता पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा प्रतिपादित जीवन विद्या की शिक्षा को केन्द्र में रखा गया। 

डॉ पण्ड्या ने पुरातन गुरु- शिष्य परंपरा के उद्धरण द्वारा शिक्षकों को अपने व्यक्तित्व को निखारने और तराशने के सूत्र बताए और कहा कि गुरु के माध्यम से ही शिष्यों के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन संभव हैं। जो जीवन को समझना सिखाए वही सच्चा गुरु है। उन्होंने असली विद्यार्थी का परिचय देते हुए कहा कि विद्यार्थी तो वे हैं, जो प्राकृतिक आपदाओं को चिरते हुए आठ- आठ घंटे पैदल चलकर पढाई करने आते हैं। उत्तराखंड के बच्चों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक तथा शिक्षक न होने पर भी ये अव्वल आते हैं। सच्चे विद्यार्थी यही है। उत्तराखंड के साथ उन्होंने तमिलनाडु को भी याद किया। उन्होंने कहा कि आज हम जिनका जन्मदिन मना रहे है, वह तमिलनाडु से ही थे, सौभाग्य से हमारे जिलाधिकारी भी तमिलनाडु से हैं। डाॅ पण्ड्या ने कहा मैं स्वयं भी एक विद्यार्थी हूं। 

जिलाधिकारी डी सेंथिल पांडियन ने कहा कि शिक्षक की पंजी विद्यार्थी ही होते हैं। अपने पिता जो स्वयं शिक्षक थे उनका संस्मरण याद करते हुए कहा कि शिक्षक कभी अपने लिए नहीं कमाता। श्री पांडियन ने देसंविवि के 12 वर्ष के आयु में ही विश्व स्तर पर देसंविवि हरिद्वार का नाम पहुंचाने के लिए कुलाधिपति महोदय को धन्यवाद दिया। साथ ही विद्या के विकास में योगदान हेतु आवाहन किया। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में धार्मिक संस्थाओं के साथ सिडकुल में अनेक कंपनियां हैं, जिसके सीएसआर कार्यक्रम के अंतर्गत कुभं नगरी को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने का आवाहन किया। 

इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरूआत सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुई। देसंविवि के छात्र- छात्राओं ने कुलगीत ‘‘सद्गुरू बिना किसी को ज्ञान कहां..’ की भावभरी प्रस्तुति दी। अंत में कुलाधिपति ने शिक्षकों को सम्मानित किया। इस अवसर पर कुलपति श्री शरद पारधी, कुलसचिव श्री संदीप कुमार सहित विभिन्न विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, विश्वविद्यालय परिवार उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन गोपाल शर्मा एवं गुलाम अस्करी जैदी ने किया। 

वहीं गायत्री विद्यापीठ, शांतिकुंज में भारतीय प्रधानमंत्री के आवाहन के मददेनजर विद्यालय में लगाई गयी बड़ी स्क्रीन में श्री नरेन्द्र मोदी के उद्बोधन सुने एवं कइयों ने अपने शंका का समाधान पाया, तो वहीं कई विद्यार्थियों ने श्री मोदी के उद्बोधन से आगे बढने की प्रेरणा पाई। प्रधानाचार्य सहित सभी शिक्षकों ने इस पहल की सराहना की।


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