Published on 2017-12-27

संस्कार गढ़ने की शुरूआत है ज्ञानदीक्षा - श्री शरद पारधी 
उत्तराखंड एवं यूपी के २०० से अधिक छात्र- छात्राएं सम्मिलित


देव संस्कृति विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा का ज्ञानदीक्षा समारोह सम्पन्न हुआ। विश्वविद्यालय के श्रीराम भवन में हुए इस समारोह में आसपास के क्षेत्रों से आए २०० से अधिक छात्र- छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति श्री शरद पारधी, दूरस्थ शिक्षा के निदेशक श्री महेन्द्र शर्मा, उपकुलसचिव कैप्टन एमके शर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया। 

इस अवसर पर कुलपति श्री शरद पारधी ने कहा कि दूरस्थ शिक्षा कामकाजी नौजवानों के लिए सुनहरा अवसर प्रदान करती हैं। डिग्री के साथ- साथ शिक्षा और विद्या का समावेश यहां के दूरस्थ शिक्षा की सबसे खास बात हैं। उन्होंने कहा कि ऋषि तंत्र से संचालित इस विश्वविद्यालय में दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से हजारों नवयुवक ने ना सिर्फ जीवन विद्या सीखा बल्कि रोजगार भी पाया है। देसंविवि से शिक्षा प्राप्त विद्यार्थी दिल्ली, चंडीगढ़, लखनऊ, रायपुर सहित कई शहरों में अपना योग सेंटर भी चला रहे हैं। 

दूरस्थ शिक्षा के निदेशक श्री महेन्द्र शर्मा ने ज्ञानदीक्षा के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ऋषियों की संस्कृति है, ऋषियों ने ज्ञान को आदान- प्रदान करने की परम्परा चलायी। ज्ञानदीक्षा कर्मकांड जितेन्द्र मिश्र ने कराया। दूरस्थ शिक्षा के कुलसचिव कैप्टन एम.के.शर्मा ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए बताया कि इस वर्ष पहली बार देसंविवि के विद्यार्थियों को दूरस्थ शिक्षा में ५० प्रतिशत की छुट दी गई है जिससे विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। इस अवसर पर देसंविवि के शिक्षा विभाग समन्वयक डॉ रमण सिंह, अश्विनी शर्मा, ज्ञान मिश्र आदि उपस्थित थे।



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