अनेक देशों के योगाचार्य, योगप्रेमियों का महासंगम

Published on 2017-12-27

भारतीय संस्कृति एक ऐसी संस्कृति है, जिसके पथ पर चलते हुए प्रगति दर प्रगति के सोपान पर चढ़ा जा सकता है। प्रगति के इन सोपानों को जानने के लिए अनेक देशों से सैकड़ों योगाचार्य, योग प्रेमी धर्मनगरी आये हैं। जो देवसंस्कृति विवि में आयोजित चौथा अंतर्राष्ट्रीय योग, भारतीय संस्कृति एवं अध्यात्म पर चल रही कार्यशाला में भागीदारी कर रहे हैं। प्रमुख वक्ताओं ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लंबे समय तक स्वस्थ्य रहना है तो योग, आसन एवं प्राणायाम करों और शाकाहारी बनो।

देसंविवि के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने बताया कि योगाचार्य एवं योग प्रेमी- योग, भारतीय संस्कृति एवं अध्यात्म को समझने के लिए देवसंस्कृति विवि में चल रहे योग महोत्सव में आये हैं। वक्ताओं ने कहा कि योग केवल आसन ही नहीं है, योग एक समग्र जीवन जीने कला है। योग सही अर्थों में अध्यात्म पथ पर चलने के लिए सीढ़ी का काम करता है। कहा कि सच्चा अध्यात्मवादी कभी भटक नहीं सकता। वे स्वयं तो ऊँचा उठता है और सैकड़ों, लाखों को ऊँचा उठाने में मदद करता है। पद्मश्री डॉ डी कार्तिकेयन ने कहा कि भारत वास्तव में योगगुुरु है, भारत ने विश्व भर में योग को फैलाया है। विश्व के अनेक देशों को दौरा करने के बाद निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि विश्व भर के लोग योग, आसन की ओर आकर्षित और शाकाहारी जीवन जीने के लिए संकल्पित हो रहे हैं।

मनोरोग विशेषज्ञ डॉ0 मीरा शर्मा ने मनोविज्ञान और अध्यात्म को जोड़कर उसके महत्व को समझाया। उन्होंने पश्चिमी मनोविज्ञान और भारतीय अध्यात्म को एक ही कड़ी में जोड़ते हुए दोनों के मर्म पर प्रकाश डाला। डा. मैनुअल रेवेरा ने कहा कि कई बीमारियों को योग से सही किया जा सकता है। उन्होनें कहा कि योग आरोग्य का आधार है। पूर्व आइएएस अधिकारी व अनेक देशों में भारतीय राजदूत के पद पर रह चुके श्री सी. एम. भण्डारी ने कहा कि पूज्य आचार्यश्री ने भी भगवान श्रीराम की तरह असत्य पर सत्य की जीत के लिए कार्य किए। उन्होंने कहा कि आचार्यश्री ने कहा है कि वर्ष 2014   पूरे विश्व के लिए युग प्रवर्तक साबित होगा और यह योग और अध्यात्म से संभव है। इसके साथ ही विभिन्न वक्ताओं ने योग, संस्कृति एवं अध्यात्म पर अपने- अपने विचार रखे।

वहीं विदेशी मेहमानों ने पवित्र पावनी गंगा मैया का दर्शन किया। शांतिकुंज दर्शन के तहत अध्यात्म, विज्ञान, ग्रह- नक्षत्र, सामाजिक, युवाओं, कुटीर उद्योग, नारी जागरण आदि विषयों पर लिखी युगऋषि की तीन हजार से अधिक पुस्तकों को देखकर सहज ही आश्चर्यचकित दिखे। दल ने कॉफी व चाय के श्रेष्ठ विकल्प के रूप में क्ख् प्रकार की जड़ी- बूटियों से मिश्रित प्रज्ञा पेय का औषधीय गुणों को जाना। वहीं सायंकालीन सत्र में प्रतिभागियों ने समूचा भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले गाँवों का भारत देखा। लगा कि गाँव का हाट उठकर देवसंस्कृति विवि में आ गया हो। हाट में लोगों ने हस्तनिर्मित बैग, फोटोफ्रेम खरीदे, वहीं जूस आदि का स्वाद भी चखा। इनमें विदेशी मेहमानों की संख्या ज्यादा थी। मेहमान ग्रामीण परिवेश का भारत देखकर काफी प्रसन्न दिखे।




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