बापू की महानता का रहस्य

Published on 0000-00-00
img

एक बार महात्मा गाँधी से एक स्पेनिश पत्रकार ने प्रश्न किया, ‘‘आप अब जिस रूप में हैं, वह बनने की प्रेरणा कहाँ से मिली?’’ गाँधी जी ने बताया, ‘‘भगवान श्रीकृष्ण, महात्मा ईसा, दार्शनिक रस्किन और सन्त टॉलस्टॉय से।’’

पत्रकार अचंभे में आ गया। उसने अनुभव किया कि इनमें से कोई भी तो गाँधी जी के समय में नहीं रहा, पर फिर उनसे प्रेरणा वाली बात वह कैसे कहते हैं? उसने अपनी आंशका व्यक्त की, इस पर गाँधी जी बोले, ‘‘महापुरुष सदैव बने नहीं रहते यह ठीक है। समय के साथ उनको भी जाना पड़ता है, किंतु विचारों, पुस्तकों के रूप में उनकी आत्मा इस धरती पर चिरकाल तक बनी रहती है। जिन्हें लोग कागज के निर्जीव पन्ने समझते हैं, उनकी आत्मा उन्हीं में लिपटी हुई रहती है। उन पन्नों में लिपटी महापुरुषों की आत्मा में लोगों को दीक्षित करने, संस्कारवान बनाने और जीवन पथ पर अग्रसर होने के लिए शक्ति, प्रकाश और प्रेरणा देने की सामर्थ्य बनी रहती है। मुझे भी इसी प्रकार उनसे प्रकाश मिला है।

गीता के प्रतिपादन किसी भी शंकाशील व्यक्ति का सही मार्गदर्शन कर सकते हैं। संसार में रहकर कर्म करते हुए भी किस प्रकार विरक्त और योगी रहा जा सकता है, यह बातें मुझे गीता ने पढ़ाईं। इस तरह मैं भगवान श्रीकृष्ण से दीक्षित हुआ। दलित वर्ग से प्रेम और उनके उद्धार की प्रेरणा मुझे बाइबिल से मिली, इस तरह में महात्मा ईसा का अनुयायी बना। युवा अवस्था में ही मेरे विचारों में प्रौढ़ता, कर्म में प्रखरता तथा आशापूर्ण जीवन जीने का प्रकाश ‘अनटु दिस लास्ट’ से मिला। इस तरह रस्किन मेरे गुरु हुए और बाह्य सुखों, संग्रह और आकर्षणों से किस तरह बचा जा सकता है, यह विद्या मैंने ‘द किंगडम ऑफ गॉड विदिन यू’ से पाई। इस तरह मैं महात्मा टॉलस्टॉय का शिष्य हूँ। सशक्त विचारों की मूर्तिमान प्राणपुंज इन पुस्तकों के सान्निध्य में नहीं आया होता, तो अब मैं जिस रूप में हूँ, उस तक पहुँचने वाली सीढ़ी से मैं उसी तरह वंचित रहा होता, जिस तरह स्वाध्याय और महापुरुषों के सान्निध्य में न आने वाला कोई भी व्यक्ति वंचित रह जाता है।’’
(वाङमय खण्ड- 58/1.27

img

मन की मलिनता मिटायें, शिवत्व जगायें

मन वस्तुत: एक बड़ी शक्ति है। आलसी और  उत्साही, कायर और वीर, दानी और समृद्ध, निर्गुणी और सद्गुणी, पापी और पुण्यात्मा, अशिक्षित और विद्वान, तुच्छ और महान, तिरस्कृत और प्रतिष्ठित का जो आकाश-पाताल का अंतर मनुष्य के बीच दिखाई पड़ता.....

img

हर व्यक्त‌ि इन बातों को समझे तो व‌िश्व में शांत‌ि और सद्भाव संभव है

एकता की स्थापना के लिए समता आवश्यक है
21 स‌ितंबर को व‌‌िश्व शांत‌ि द‌िवस के रुप में मनाया जाता है क्योंक‌ि मानव के व‌िकास और उन्नत‌ि के ल‌िए शांत‌ि सबसे जरुरी तत्व है। लेक‌‌िन साल में स‌‌िर्फ एक द‌िन को शांत‌ि.....

img

चोबीस मिनट में पाइए चौबीस घण्टों का स्वास्थ्य


आने वाले २१ जून को सम्पूर्ण विश्व में विश्वयोग दिवस मनने जा रहा है। प्रधान मन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की पहल पर इस विश्व स्तरीय स्वास्थ्य संरक्षण एवं समग्र स्वास्थ्य के प्रति जन- मनों में जागरूकता लाने वाला अन्तर्राष्ट्रीय.....


Write Your Comments Here: