नेपाल आपदा में अखिल विश्व गायत्री परिवार की सक्रिय भूमिका

Published on 2015-05-07

गायत्री परिवार स्कूलों एवं गाँवों के पुनर्वास का कार्य करेगा- डॉ.प्रणव पण्ड्याजी

अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख एवं देसंविवि के कुलाधिपति डॉ.प्रणव पण्ड्याजी, शांतिकुञ्ज के व्यवस्थापक श्री गौरीशंकर शर्मा जी एवं दे.सं.वि.वि.के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या नेपाल में गायत्री परिवार द्वारा चलाये जा रहे आपदा का निरीक्षण करने, भावी योजना बनाने एवं पुनर्वास हेतु विशिष्ट भूमिका सम्पादित करने नेपाल पूर्व उपप्रधानमंत्री श्री के.पी.ओली, एवं चीफ सेक्रेटरी श्री लीलामणि पौडियाल से विशेष चर्चा करने 4 मई को काठमाण्डू पहुँचे। उल्लेखनीय है कि आपदा के दूसरे ही दिन 26 अप्रैल को ही दर्जन भर वाहनों से श्री वीरेन्द्र तिवारी जी,श्री राजू अधिकारी एवं डॉ.भीखू भाई के नेतृत्व में उत्तरप्रदेश, गुजरात, मुम्बई के सैकड़ों कार्यकर्ता, एम्बूलेंस, दवाई, कम्बल, खाद्य सामिग्री लेकर पहले ही पहुँच चुके थे।

डॉ.प्रणव पण्ड्याजी ने बताया कि रेस्क्यू एवं रीलिफ के बाद नेपाल सरकार के साथ मिलकर पुनर्वास के लिए गाँव एवं स्कूलों को गोद लेने उन्हें विकसित करने का कार्य गायत्री परिवार करेगा। इसके लिए सेक्रेटरी स्तर से बातचीत चल रही है। आद.गौरीशंकर शर्मा जी ने नेपाल वासियों को कहा ‘इस आपदा की घड़ी में समूचा गायत्री परिवार का स्नेह, अपनत्व, राहत पूरे नेपाल के नवनिर्माण के लिए है’

इसके बाद अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से नेपाल प्रहरी प्रशिक्षण प्रतिष्ठान, महाराजगञ्ज में बनाया गया आपदा राहत बेस केम्प का निरीक्षण भ्रमण किया। नेपाल पुलिस के ए.आई.डी.जी.पी. आद.राजेन्द्र सिंह भण्डारी ने अतिथियों का स्वागत किया और आपदा व्यवस्थापन और पुनर्निर्माण कार्य के साथ मिलकर काम करने की बात कही।

शांतिकुञ्ज से आई उच्चस्तरीय दल ने पूर्व कार्य कर रहे गायत्री परिवार के आपदा राहत दल के साथ मिलकर काठमाण्डू में भूकम्प पीडित क्षेत्र वनस्थली क्षेत्र में जाकर भूकम्प पीड़ितों को राहत सामिग्री वितरित किया। जहाँ पर गायत्री परिवार के अग्रज कार्यकर्ता नरहरि धिमिरे ने अतिथियों का स्वागत किया। पूरे दल ने भूकम्प के कम्पन से अत्यधिक प्रभावित ऐतिहासिक धरोहर और प्राच्य मंदिरों की नगरी भक्तपुर का भ्रमण किया।

दूसरा दल डॉ.चिन्मय पण्ड्या जी के नेतृत्व में काठमाण्डू से ६५ कि.मी.दूर सिन्धुपारचौक गये जहाँ भूकम्प से सबसे अधिक प्रभावित हुए। डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी ने अपनी टोली की साथ उस स्थान का जायजा लिया। वहाँ पर 300 दिनों से हिसान, नोबेल अस्पताल, नेपाल स्काउट जैसे संस्थाओं के साथ मिलकर आपदा राहत कैंप चल रहा है। जहाँ से खाद्य सामग्री, कम्बल, बर्तन, त्रिपाल पीड़ितों को दिया गया। मुम्बई और गुजरात से आई हुई गायत्री परिवार के आपदा दल से जुड़े डाक्टरों की टोली द्वारा दैनिक ३०० घायल और मरिजों का उपचार किया गया। डॉ.चिन्मय पण्ड्या ने कहा- यह कैंप पीड़ा निवारण के लिए सबके लिए एक आदर्श केम्प बना हुआ है।

प्रवास में पूर्व उपप्रधानमंत्री श्री के.पी.औली, श्री एल एम पौडियाल नेपाल के चीफ सेक्रेटरी, जया एम खनल सचिव उद्योग मंत्रालय, श्री राजेन्द्र सिंह भण्डारी एडिशनल इंस्पेक्टर जनरल पोलिस, रूद्र प्रसाद बसयाल डीएसपी, श्री युवराज धिमरे नेपाल में मीडिया प्रमुख से विशेष मुलाकात एवं चर्चा हुई।

गायत्री परिवार द्वारा चलाये जा रहे राहत कार्य को देखकर पूर्व डिप्टी प्रधानमंत्री श्री के.पी.औली ने कहा- ‘भूकम्प, बाढ़, तूफान से जूझने के लिए गायत्री परिवार के पास जो अनुभव एवं तकनीकि ज्ञान है उसे नेपालवासियों ने प्रत्यक्ष अनुभव किया। सच्चे अर्थों में गायत्री परिवार ने ही विपदा की घड़ी में बिना नाम- यश के सेवा कार्य किया है। हम सभी गायत्री परिवार के इसी आपदा प्रबंधन के इसी सिस्टम को लागू करेंगे।




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