बच्चों की पढ़ाई, शुद्ध जल की उपलब्धता और मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था करेगा शांतिकुंज .


     युगतीर्थ शांतिकुंज के व्यवस्थापक एवं आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ शांतिकुंज के प्रभारी गौरीशंकर शर्मा, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या एवं अपने सहयोगी विष्णु मित्तल, राकेश जायसवाल के साथ लक्सर के पास के बाढ़ प्रभावित गाँवों का निरीक्षण करने पहुँचे। उन्होंने वहाँ के गंगदासपुर खुर्द, गंगदासपुर कलाँ, शेरपुर बेला, शेरपुर मांडा गाँवों में जाकर वहाँ की स्थिति और गायत्री परिवार द्वारा चलाये जा रहे आपदा प्रबंधन कार्यों का निरीक्षण किया। कुछ जलमग्न गाँवों में तो वे जल पुलिस की मोटर बोट से पहुँच पाये। शांतिकुंज की ओर से राहत कार्यों में सक्रिय सूरत सिंह अमृते की टोली एवं स्थानीय रमेश, सरमन, वेदपाल आदि ग्रामवासियों ने उन्हें परिस्थितियों की विस्तार से जानकारी दी।
    
गौरीशंकर शर्मा और डॉ. चिन्मय पण्ड्या इन गाँवों के डेढ़- दो सौ लोगों से मिले और उनकी कुशलक्षेम जानी। पिछले एक माह से भी अधिक से अपनी छतों पर आश्रय लिये गाँववासियों की व्यथा ने उन्हें द्रवित कर दिया। उनके घर पानी में डूबे हैं और मवेशियों के चारे- पानी का भारी संकट है। गाँववासियों को पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि गाँव और स्कूलों के चारों ओर पानी होने के कारण उनके बच्चों के पढ़ने की व्यवस्था नहीं है, बोट से आकर पढ़ाने का जोखिम लेने को शिक्षक राजी नहीं हैं। शांतिकुंज प्रतिनिधियों ने उनकी वेदना समझते हुए उनके बच्चों की पढ़ाई, पीने के लिए पानी और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करने के साथ आवश्यकता के अनुसार भोजन और राशन उपलब्ध कराने में पूरा- पूरा सहयोग करने का आश्वासन दिया।
 
इस क्षेत्र में शांतिकुंज के आपदा राहत कार्यों का संचालन कर रहे सूरत सिंह अमृते के अनुसार उनकी टोली 22 जून से ही पीड़ित गाँवों में सक्रिय है। आरंभिक दिनों में उन्होंने कई गाँवों के हजारों गाँववासियों को भोजन उपलब्ध कराया। फिर प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर जरूरतमंदों को सूखा राशन, सूखा नाश्ता, त्रिपाल, पहनने के नये कपड़े और मवेशियों के लिए चारा प्रदान किया। सेवाकार्य आज भी अनवरत चल रहे हैं। उनकी टोली क्षेत्र के 24 गाँवों में सेवा कार्य कर रही है, जिनमें उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश के सिताबपुरी, नयागाँव और मजलिसपुर तोफिर भी शामिल हैं।

शांतिकुंज
मवेशियों के लिए 5 ट्रक भूसा इन गाँवों में अब तक बाँट चुका है और 24 ट्रक और बाँटने की उसकी योजना है। श्री गौरीशंकर शर्मा जी ने विद्यार्थियों के लिए बच्चों को कॉपी, किताब व आवश्यक अन्य सामग्री उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया, वहीं प्रति कुलपति
डॉ. चिन्मय पंड्या ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को इन गाँवों में भेजकर बच्चों को पढ़ाने का आश्वासन दिया। पेय जल की व्यवस्था के लिए शांतिकुंज बड़े- बड़े टब, कंटेनर आदि उपलब्ध करायेगा, ताकि जल में क्लोरीन की टिकिया डालकर उसे पीने योग्य बनाया जा सके।





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