देसंविवि के कागज उद्योग में लगा बीटर का शुभारंभ स्वावलम्बन में सुख- शांति निहित :: डॉ. प्रणव पण्ड्याजी

Published on 2017-12-27
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गायत्री तीर्थ शांतिकुंज व देवसंस्कृति विवि में कागज व उससे विनिर्मित सामग्री के उपयोग की बढ़ती माँग को देखते हुए कागज उद्योग विभाग में बीटर का शुभारंभ हुआ। बीटर वह मशीन है, जिसके माध्यम से पुराने कपड़े, कागज को पानी में घोलकर लुगदी तैयार किया जाता है। इसी लुगदी को कागज बनाने में प्रयोग किया जाता है। मशीन के प्रयोग से एक ओर जहाँ हस्तनिर्मित कागज की गुणवत्ता सुधरेगी, वहीं कागज की कमी भी पूरी की जायेगी।
मशीन का शुभारंभ करते हुए देवसंस्कृति विवि के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि समाज के स्वस्थ और टिकाऊ विकास का आधार है स्वावलम्बन। यह केवल जीवकोपार्जन का साधन ही नहीं, एक मानसिकता भी है, जो दूसरो की गुलामी करने के बजाय अपने संसाधनों का सदुपयोग करते हुए श्रमशील, स्वस्थ्य जीवन जीने की प्रेरणा देती है। स्वावलम्बन में सुख- शांति निहित है।

व्यवस्थापक श्री गौरीशंकर शर्मा ने कहा कि इस बीटर मशीन से एक बार में 50 किग्रा लुगदी तैयार होगी। इससे कागज के स्तर में सुधार आयेगा। श्री शर्मा ने बताया कि विभाग के माध्यम से लोगों को नि:शुल्क प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। इसके अलावा स्वावलंबन विभाग द्वारा संचालित जूट बैग, ऊनी दरियाँ, फल सब्जी संरक्षण, गौ उत्पाद व हथकरघा का भी नि:शुल्क ट्रेनिंग दी जायेगी। इसमें उत्तराखंड त्रासदी से पीड़ित व गरीब लोगों को प्राथमिकता दी जायेगी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान आवास, भोजन की व्यवस्था भी नि:शुल्क रहेगी।

विभाग के समन्वयक डॉ. टीसी शर्मा के अनुसार कागज व उससे दैनिक जीवन व कार्यालय में प्रयोग किये जाने वाले 50 प्रकार के कागज बनाये जा रहे हैं।
इस हस्तनिर्मित कागज से विजिटिंग कार्ड, एल फोल्डर, कोबरा फाईल, फाईल कव्हर, लिफाफा, कैरीबैग, फोटो फे्रम, पैन स्टैण्ड, फ्लावर पोट सहित विभिन्न प्रकार की सामग्री बनाई जा रही हैं।


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