समूह साधना कार्यक्रम |

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वर्ष २०१४ को समूह साधना वर्ष घोषित किया जा रहा है। अपने- अपने स्तर से समूह साधना कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु, वंदनीया माताजी एवं परम पूज्य गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु निम्र प्रकार से अपनी भागीदारी सुनिश्चित करना हैः १. विभिन्न शक्तिपीठ, शाखाओं द्वारा विशेष साधना शिविर आयोजित किये जायें।२. देशव्यापी जोन, उपजोन, शक्तिपीठ, शाखाओं, मण्डलों सहित जगह- जगह दैनिक और साप्ताहिक साधना के प्रयोग आरंभ किये जायें। ३. समूह साधना वर्ष के उपलक्ष्य में विशेष साधना अनुष्ठानों का आयोजन हों।४. छोट- छोटे प्रयास हों, जन- जन की भागीदारी सुनिश्चित की जाय।५. कार्यालयों में काम- काज का आरम्भ पाँच मिनट की सामूहिक ध्यान, जप, प्रार्थना से हों। ६. हर विभाग में सुविधानुसार आधे घण्टे का समय तय किया जायें। विभाग के सभी भाई- बहिन उसमें भागीदारी करें। ७. विभिन्न शिविरों की कक्षा, संस्कार, संगोष्ठीयों का आरम्भ भी पाँच मिनट की सामूहिक ध्यान, जप, प्रार्थना से हों। ८. शिक्षण संस्थानों की प्रार्थना सभा, संगोष्ठीयों के आरम्भ में भी यही क्रम अपनाया जाय। कक्षाएँ आरम्भ करने के पूर्व भी गायत्री मंत्र के बाद दो मिनट मौन प्रार्थना, साधना भी की जाय।९. विभिन्न संगठनों से अपने इष्टमंत्र, नाम, जप के साथ इसी तरह की प्रार्थनाएँ करने का अनुरोध किया जाय। १०. घर, दुकान, कार्यालय, सार्वजनिक स्थानों पर भी मानव मात्र के उज्जवल भविष्य के लिए ऐसे प्रयोग किये जायें।

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समस्त वर्तमान समस्याओं का समाधान है -गायत्री और यज्ञ -डॉ. चिन्मय पण्ड्याजी

शांतिकुंज प्रतिनिधि ने मंगलगिरि, अमरावती में होने जा रहे गायत्री अश्वमेध महायज्ञ की जानकारी दी, साधना, समयदान, अंशदान कर दैवी अनुदान पाने का आमंत्रण दिया।हैदराबाद। तेलंगाना गायत्री परिवार हैदराबाद ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी की मुख्य.....

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गुरु देव को जानना है तो अखण्ड ज्योति पढ़ो

जोबट दिनांक 17 अगस्त 2014 स्थानीय गायत्री शक्तिपीठ में अखण्ड ज्योति पाठक सम्मेलन का आयोजन किया गया ।। इसमें मुख्य अतिथि थे श्री शम्भु सिंह पुरोहित सचिव भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा झाबुआ । यह उल्लेखनीय है कि श्री पुरोहित अकेले.....

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गुरुपूर्णिमा की पूर्व संध्या पर वरिष्ठ वक्ताओं के प्रेरक उद्गार



आदरणीय श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी गुरुतत्त्व ज्ञान, तप और संवेदनाओं का समुच्चय है। व्यक्ति यदि ज्ञानी और तपस्वी है, लेकिन उसकी संवेदनाएँ नहीं जगी तो वह उसमें अहंकार जैसे विकार पैदा हो जायेंगे।  युग के निर्माण के लिए गुरुदेव ने गुरुतत्त्व जगाया,.....


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