पथरी वन रेंज में रह रहे लोगों को भोजन, पानी, त्रिपाल आदि उपलब्ध कराये !!

लक्सर तहसील के बाढ़ प्रभावित गाँव गंगदासपुर और महाराजपुर के लगभग 150 विस्थापित परिवारों को शांतिकुंज पिछले दो दिनों से भोजन, पानी की सुविधायें उपलब्ध करा रहा है। शांतिकुंज के व्यवस्थापक और आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ प्रभारी गौरीशंकर शर्मा के अनुसार ये गाँववासी जब तक अपने गाँवों में नहीं लौट जाते, शांतिकुंज हर प्रकार से उनकी सेवा-सहायता करता रहेगा। उल्लेखनीय है कि पिछले लगभग दो माह से बाढ़ के कारण टापू बने इन गाँवों के लोग अब अपना गाँव छोडकर पथरी वन रेंज के वीरान क्षेत्र में रह रहे हैं। गौरीशंकर जी ने बताया कि जैसे ही उन्हें इस बात का पता चला, शांतिकुंज ने पीडितों की पीड़ा को अनुभव करते हुए विस्थापितों के लिए भोजन-पानी भेजना आरंभ कर दिया है।

पथरी वन रेंज के वीरान क्षेत्र में गंगदासपुर और महाराजपुर गाँवों के 150 परिवारों के 6 माह से 75 वर्ष तक की उम्र के लोग अपने मवेशियों के साथ खुले आसमान के नीचे जीवनयापन कर रहे हैं। वे लाइट, ईंधन, राशन, पानी आदि सभी सुविधाओं से वंचित हैं। जब बरसात होती है तो वे एक गाड़ी के नीचे आकर अपना सिर बचाते हैं। महाराजपुर के रितेश कुमार, सुभाष, इथलेश कुमार आदि के अनुसार पिछले दो दिनों से उन्होंने इसी प्रकार रातें गुजारी हैं।

रक्षाबंधन के दिन गाँव में भोजन-पानी लेकर गयी विष्णु मित्तल, नरेन्द्र ठाकुर की टोली ने बताया कि उन्होंने गाँववासियों को ओस, ठंड, बरसात में सिर छिपाने के लिए त्रिपाल आदि भी दिये हैं। उनके माध्यम से शांतिकुंज प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या और शैल जीजी ने इन गाँववासियों तक अपना संदेश पहुँचाते हुए उनकी हर प्रकार की सहायता करते रहने का आश्वासन दिया है। उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र के लगभग 24 बाढ़ प्रभावित गाँवों में शांतिकुंज द्वारा पिछले दो माह से भोजन, पानी, राशन, कपड़े, बर्तन, पशुओं के लिए चारा आदि देने की निरंतर सेवा की जा रही है।

शांतिकुंज की सेवाएँ पाकर सभी गाँववासियों का हृदय भाव विभोर है। गंगदासपुर के बालचंद ने कहा कि संकट की घड़ी में शांतिकुंज हमारा जिस प्रकार साथ दे रहा है, उसे देखकर हम परमात्मा से यही प्रार्थना करते हैं कि सेवा की ऐसी भावना हर मानव के हृदय में विकसित हो। रितेश कुमार ने कहा कि दूसरों की पीड़ा को अनुभव करना ही सच्ची इंसानियत है। सुभाष का कहना है कि पिछले दो माह से शांतिकुंज की सेवा-सहायता पाते हुए हमने अनुभव किया है कि परिवार किसे कहते हैं। ये लोग हमारे जीवन को अच्छा बनाना चाहते हैं तो हम भी उनकी बात मानकर अपने और अपने समाज को सुधारने का प्रयास करेंगे।





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