देसंविवि में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन हर्षोल्लास के साथ मनाया


    प्राचीन आरण्यक परंपरानुसार संचालित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज में भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद करते हुए शिक्षक दिवस मनाया गया। इस अवसर पर कुलाधिपति डॉ.प्रणव पण्ड्या समारोह के मुख्य अतिथि थे। उन्होंने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए उनकी शिक्षाओं को याद किया। विवि के सभी आचार्यों को विद्यार्थियों ने गुलदस्ता भेंटकर अपनी सद्भावना व्यक्त की, वहीं देसंविवि के अभिभावक कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने सभी आचार्यों को अपने आचरण से शिक्षा देने की बात कही।
    कुलाधिपति ने डॉ. पण्ड्या ने कहा कि  जिस तरह अर्जुन की असमंजस की स्थिति को उनके गुरु श्रीकृष्ण से मिटाया, उसी तरह आज शिक्षकों-गुरुओं को अपने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करना चाहिए, तभी नौनिहालों को संस्कारित कर उन्हें श्रेष्ठ नागरिक बनाया जा सकता है। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि बीएचयू में कुलपति रहते हुए डॉ. राधाकृष्णन गीता की कक्षाओं के माध्यम से अपने विद्यार्थियों को जीवन जीने की कला, जीवन का अनुशासन सीखाते थे। उसी का परिणाम था कि उनके विद्यार्थी श्रेष्ठतर कार्य कर पाये। उन्होंने कहा कि शांति निकेतन की भाँति विद्यार्थी पुस्तकों का बोझ ढोने के लिए विवश किये जाने की बजाय प्रकृति के साहचर्य के साथ पढ़ाये-सिखाये जायें तो विद्यार्थी प्राकृतिक रूप से  स्वच्छ व धवल जीवन अपनाने की ओर अग्रसर होंगे।
    शिक्षक दिवस पर गायत्री परिवार के मुखिया डॉ. पण्ड्या ने उत्तराखण्ड त्रासदी से प्रभावित रुद्रप्रयाग व चमोली के अनेक स्कूल, महाविद्यालयों के क्षतिग्रस्त भवनों को ठीक कराने की घोषणा की।
    इससे पूर्व देसंविवि में अध्ययनरत भूटान की टिलू माया ने गुरु भक्ति पर आधारित एकल नृत्य प्रस्तुत करते हुए सभी को रोमांचित कर दिया। वहीं महान गुरुओं को समर्पित गुरु वंदना पर आधारित कत्थक व समूह नृत्य को विद्यार्थियों ने तालियाँ बजाते हुए सराहा। सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों ने राजा भर्तृहरि के त्याग व गुरु भक्ति का मार्मिक चित्रण किया।
    वहीं गायत्री विद्यापीठ में शिक्षक दिवस पर कक्षा ११ व १२ विद्यार्थी शिक्षकों की भूमिका में नजर आये। उन्होंने अपने जूनियर बच्चों के साथ अपने अनुभव बाँटे। प्रधानाचार्य श्री कैलाश महाजन ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों ने शिक्षक की महान परंपरा को याद किया। इनमें डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के व्यक्तित्व एवं कृतित्वों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया था।







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