Published on 2020-02-28
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सहज क्रम होली एक ऐसा पर्व है, जिसमें वसन्त की पावन मस्ती मानो जन-जन के अन्दर भर जाती है। उसका ऐसा प्रवाह उमड़ता है जिसमें छोटे-बड़े, अमीर-गरीब, अवर्ण-सवर्ण सभी भेद बह जाते हैं। मैत्री भाव का, समता का सुन्दर माहौल बन जाता है। युग निर्माण अभियान से जुड़े सभी व्यक्तियों और संगठित इकाइयों को ऐसे प्रयास करने चाहिए कि इस पुण्य पर्व की सर्वहितकारी प्रेरणाएँ जन-जन तक पहुँचाई जा सकें। उसका प्रभाव समाज के स्थाई चरित्र पर भी पड़े। इसी के साथ गिनेचुने व्यक्तियों द्वारा स्वार्थ या अहंकार भरी मस्ती में किए जाने वाले अभद्र अरुचिकर प्रसंगों को न उभरने देने की सावधानी भी बरती जाए। इस सुन्दर माहौल में, खीर में कंकड़ पड़ने जैसी विसंगतियों से बचा जा सके। जन प्रचलन में होलिका दहन तथा उसके अगले दिन रंग गुलालयुक्त हर्षोत्सव ही प्रधान होते हैं। लेकिन उनकी तैयारी कई दिन पहले से योजनाबद्ध ढंग से की जाती है, तब पर्व का वातावरण बनता है। इस पर्व के साथ ऋषि प्रणीत प्रेरणाओं और परम्पराओं को शामिल करने के लिए भी कई दिन पूर्व से तैयारी की जाये तो उसके साथ नए सर्वहितकारी अध्याय जुड़ सकते हैं। विषेष प्रयोग : इस होली पर्व में उक्त प्रेरक प्रभाव पैदा करने के लिए अपने परिजन होलिका दहन के लगभग एक सप्ताह पूर्व से सक्रिय हों। • नगरों और गाँवों के हर मोहल्ले में भी होलियाँ जलाई जाती हैं। उनकी कुछ घोषित-अघोषित कमेटियाँ भी होती हैं। उन कमेटियों के समझदार, ज़िम्मेदार व्यक्तियों से अपने सधे हुए परिजन सम्पर्क करें। उन्हें निम्न लिखित बिन्दुओं पर सहमत करने का प्रयास करें। • होली में उसके परम्परागत उल्लास के साथ उसकी सांस्कृतिक गरिमा को भी जगाने, जोड़ने के प्रयास हों। - होली को अश्लील चित्रों की होली जलाने और परस्पर के द्वेष को त्यागकर मैत्री भाव जगाने के प्रयोग जोड़े जायें। इनमें नशा-व्यसन निवारण को प्राथमिकता दी जाय। जो सहमत हो जायें उनसे यह आग्रह किए जायें• वे अपने क्षेत्र में होलिका दहन के दिन, सवेरे एक रैली निकालें। उसमें घरों में रखे अश्लील चित्रों और साहित्य को इकट्ठा किया जाय। उन्हें होलिका दहन के समय बहिनोंभाइयों द्वारा अग्नि में झौंका जाय। पुन: उन्हें घर में न लाने के संकल्प भी कराए जायें। • जनसंपर्क द्वारा लोगों से नशा-व्यसन छोड़ने के संकल्प कराए जायें। उनके व्यसनों को कागज़ पर लिखकर उन्हें भी संकल्पकर्त्ताओं के नाम की घोषणा केसाथ होली में झोंका जाय।
• होली खेलने के दिन बरते जाने वाले अनुशासनों को तय करके बड़ों और बच्चों से उसे अपनाने की अपील की जाय। जैसे ज़हरीले रंगों, कालिख, वार्निशपेंट जैसे रंगों का प्रयोग न करना। अमर्यादित-अभद्र व्यवहार न करना आदि। यह सावधानियाँ बरतने से तमाम हानियों से बचा जा सकता है। कई जगह प्रभावशाली व्यक्तियों के सहयोग से ऐसे प्रयोग बहुत सफल और सराहनीय सिद्ध हुए हैं।
• सामाजिक सामंजस्य बढ़ाने के लिए कुुछ सधे हुए युवा और  प्रौढ़ों की टोली उपेक्षित बस्तियों में जाकर वहाँ के व्यक्तियों से स्नेह मिलन का क्रम भी बना सकते हैं। • हो सके तो होली खेलने के दूसरे दिन गाँव-मोहल्लों में सामूहिक स्वच्छता-श्रमदान किया जाय। • अपनी पीठों पर, मण्डलों के केन्द्रों पर होलिका दहन के दिन शाम को एक होलिका पर्व पूजन रखा जाय। जनसंपर्क में सहमत व्यक्तियों को उसमें सादर आमंत्रित किया जाय। कर्मकाण्ड भास्कर के अनुसार एक-डेढ़ घंटे में पर्व की प्रेरणाएँ पूजन क्रम के माध्यम से लोगों को हृदयंगम कराई जायें। अंत में सीमित संख्या में दीपक प्रज्वलित करके आहुतियाँ कराई जायें। ध्यान रहे यह क्रम होलिका दहन के समय के कम से कम डेढ़ घंटे पहले पूरा कर लिया जाय। पधारे प्रतिनिधियों को अपनेअपने क्षेत्र की होलियों में कुछ नए प्रयोग जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाय।


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