नेशनल कांफ्रेस ऑफ वाईस चांसलर्स में डॉ. पण्ड्या ने कहा विद्यार्थियों को शिक्षा ही नहीं विद्या से भी अवगत करायेंस्वामी विवेकानंद की १५०वीं सार्धशती के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित नेशनल कांफे्रस आफ वाइस चांसलर्स में अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या प्रमुख वक्ता के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालयों में चल रही शिक्षण पद्धति पर अपनी गहरीं चिंता व्यक्त की।विभिन्न देशों के अपने लम्बे समय के अनुभवों को साझा करते हुए डॉ पण्ड्या ने विश्वविद्यालयों में शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों को विद्या अर्थात् जीवन जीने की कला सिखाने पर जोर दिया। शिक्षा जहाँ रोजगार का अवसर प्रदान करता है वहीं विद्या चरित्र का निर्माण करती है। कुलाधिपति डॉ पंड्या ने युगऋषि पूज्य आचार्य जी के विचारों पर आधारित एवं प्राचीन गुरुकुल परंपरा के अनुसार चल रहे देवसंस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार का उदाहरण देते हुए कहा कि इस विवि में शिक्षा और विद्या का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में आये पाच काल में से उपनिषद् काल ने हमें बहुत कुछ दिया है, उसे हम स्वर्णिम काल भी कह सकते है। उन्होंने उपस्थित कुलपतियों से आवाहन किया कि हम सब मिलकर उस सुनहरे दिन से मिले अमृत को नयी पीढ़ी तक पहुंचाएं, यही स्वामी विवेकानंद के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।कार्यशाला में डॉ प्रणव पण्ड्या के अलावा भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ एमएम पल्लम राजू, परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ अनिल काकोडकर आदि ने कुलपतियों एवं शिक्षाविदों को विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों के विकास हेतु कार्यक्रम चलाने की सलाह दी। इस अवसर पर बैंगलूर विवि के कुलपति प्रो० थिम्मे गौड़ा ने डॉ पण्ड्या को शिक्षा के क्षेत्र में किये गये उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया।


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