Published on 2017-07-19

शांतिकुंज प्रतिनिधि ने मंगलगिरि, अमरावती में होने जा रहे गायत्री अश्वमेध महायज्ञ की जानकारी दी, साधना, समयदान, अंशदान कर दैवी अनुदान पाने का आमंत्रण दिया।

हैदराबाद। तेलंगाना 
गायत्री परिवार हैदराबाद ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी की मुख्य उपस्थिति में गुरुपूर्णिमा महोत्सव मनाया। ६ जुलाई को यह कार्यक्रम शृंग ऋषि भवन, फीलखाना में आयोजित किया गया था, जिसमें विशाल दीपयज्ञ, सामूहिक ध्यान और सामूहिक जप के कार्यक्रम रखे गये। 

डॉ. चिन्मय जी ने नैष्ठिक परिजनों और गणमान्यों को संबोधित करते हुए गायत्री और यज्ञ को आज की समस्त समस्याओं का समाधान बताया। उन्होंने कहा कि समाज में प्रेम, एकता, सद्भाव तभी संभव है जब मनुष्य विवेकदृष्टि से परिस्थितियों को देखे, निष्पक्ष भाव से अच्छाइयों को अपनाये और बुराइयों से बचे- बचाये। यही गायत्री का तत्त्वदर्शन है, गायत्री उपासना यही दृष्टि प्रदान करती है। 

यज्ञ केवल अग्नि प्रज्वलन और सुवासित परिवेश के लिए नहीं किया जाता, सबके हित की सोचना और उसके लिए तपपूर्वक स्वयं कष्ट उठाना  यज्ञ का वास्तविक दर्शन है। मन में यज्ञभाव आते ही ईर्ष्या, द्वेष, वैमनस्य, कुविचारों का अंत होने लगता है। देवासुर संग्राम में देवताओं की वास्तविक विजय यही है। 

आरंभ में स्थानीय वरिष्ठ कार्यकर्त्ता श्री गोकुलचंद उपाध्याय जी ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर बल्देव सिंह लोध, भगवान ओझा, हरिकिशन ओझा, सुरेश तिवारी, शांता उपाध्याय, निर्मला वैष्णव, किरन ओझा, अनिल सुब्बाराम, एम.वी.एस. राजू आदि गणमान्य मुख्य रूप से उपस्थित थे। 



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