1370 छात्रों को दी जाएंगी उपाधियां,  इनमें 32 को स्वर्ण पदक यूरोप के प्रो० मार्को कोरोनी और भारतीय साहित्यकार नरेंद्र कोहली को मानद उपाधि|
 
हरिद्वार,  दिसम्बर। देवसंस्कृति विश्ववविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी विश्वविद्यालय के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को पदकों से सम्मानित करेंगे। समारोह नौ दिसंबर रविवार को होगा। इस अवसर पर वे विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अग्रणी जनों को मानद उपाधि भी प्रदान करेंगे। मानद उपाधि से सम्मानित होने वालों में वैकल्पिक चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए योरोपीय विद्वान प्रो.मार्को सेरेनी एवं साहित्य के क्षेत्र में भारतीय साहित्यकार श्री नरेन्द्र कोहली शामिल हैं। इस वर्ष देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थी भी पहली बार दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होंगे। समारोह में विभिन्न विषयों के 32 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक दिए जाएंगे और 77 विद्यार्थी डाक्टरेट की उपाधि से सम्मानित होंगे।  कुल 1370 डिग्रियां प्रदान की जायेगी । समारोह में राष्ट्रपति महोदय विश्वविद्यालय परिसर में अध्ययनरत लगभग भारत के बीस राज्यों एवं अन्य उपस्थित देश- विदेश के विद्यार्थियों तथा वहां मौजूद परिजनों को विशेष उद्बोधन भी देंगे।

     देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ० प्रणव पण्ड्या दीक्षांत समारोह की तैयारियों के  बारे में विश्वविद्यालय परिवार से चर्चा के दौरान कहा कि देश की आजादी के दौरान विकास को लेकर तीन महान पुरुषों के स्वप्न तैर रहे थे। एक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जो भारत की बेहतरी के लिए देश को एक विशाल सहकारी संस्था के रूप में देखना चाहते थें। दूसरा स्वप्न पं. जवाहर लाल नेहरू का था, जो जीवनसत्य के साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी का समन्वय चाहते थे। तीसरा स्वप्न श्रीअरविन्द का था  जो नये भारत को सभी दिशाओं, सभी वर्गों के बीच से उभरते देखना चाहते थे। किसानों की कुटी भेदकर, घरेलू हुनर के बीच से, कारखानों, हाटों, बाजारों, झाड़ियों, पहाडों से भारत का उदय ।

      डॉ० पण्ड्या ने कहा कि देवसंस्कृति विश्वविद्यालय की शिक्षा प्रणाली में इन तीनों दर्शनों  का समन्वय है। उन्होंने बताया कि जहाँ एक ओर विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की चयन प्रक्रिया के माध्यम से देश के सभी राज्यों को मिलने वाला प्रतिनिधित्व और सहकारिता के सूत्रों पर आधारित उनकी दिनचर्या का समावेश है , वहीं उच्च गुणवत्ता आधारित इसकी शिक्षा प्रणाली तथा शिक्षा पूरी करने के बाद देश भर में परिवीक्षा ( इंटर्नशिप)  के दौरान नये भारत की संकल्पना को उतारने का अभियान चलाना  भी उन सपनों को साकार करने का एक हिस्सा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के कुलपिता एवं युगऋषि आचार्य श्रीराम शर्मा जी ने आजादी आंदोलन के दौरान  व्यक्ति िनर्माण अौर समाज नर्माण की आधारशिला के रूप में इसे साकार करने का संकल्प लिया था, जिसकी ही परिणीति देवसंस्कृति विश्ववविद्यालय है।
     विश्ववविद्यालय के प्रतिकुलपति  डॉ० चिन्मय पण्ड्या  ने बताया कि मानव चेतना एवं योग विज्ञान, नैदानिक मनोविज्ञान, समग्र स्वास्थ्य प्रबंधन,  भारतीय संस्कृति एवं पर्यटन, कम्प्यूटर, एनिमेशन, जनसंचार एवं पत्रकारिता, ग्राम प्रबंधन जैसे विभिन्न विषयों में परास्नातक, स्नातक एवं प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम में भारत के साथ विदेशों के विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। अध्ययन के उपरांत सभी विषयों के विद्यार्थी तीन माह के लिए अनिवार्य रूप से देश के विभिन्न क्षेत्रों में जा-जाकर समाज सेवा के माध्यम से अपने ज्ञान की प्रामाणिकता सिद्ध करते हैं। शिक्षा जगत में यह एक मिसाल है।

    उन्होंने कहा तीन माह के इस प्रयोग द्वारा जहां मानव चेतना एवं योग के विद्यार्थी निःशुल्क योग चिकित्सा शिविर के माध्यम से निरोग बनाने का सूत्र प्रदान करते हैं, वहीं मनोविज्ञान के विद्यार्थी जनमानस की मनोवैज्ञानिक समस्याओं से निजात दिलाते हैं। जनसंचार एवं पत्रकारिता के छात्र-छात्राएं समसामयिक मुद्दों के प्रति जनसामान्य को जागरूक करतें हैं। ग्राम प्रबंधन के छात्र गांव गांव जाकर  लोगों को स्वस्थ, स्वच्छ, स्वावलम्बी और नशामुक्त जीवन की व्यावहारिक प्रेरणाएं देते हैं। धर्म के प्रति सद्भाव जगाने एवं साम्प्रदायिक सौहार्द विकसित करने का दायित्व धर्म विज्ञान के विद्यार्थियों की दायित्व रहता है। समग्र स्वास्थ्य प्रबंधन के विद्यार्थी स्थानीय आयुर्वेदिक वनौषधियों के प्रति जागरूकता पैदा करते हैं। इंटर्नशिप ट्रेनिंग के द्वारा छात्रों का संपूर्ण व्यक्तित्व उभर कर सामने आता है, सहकारिता, समता, स्वावलम्बन एवं सद्भाव उनके जीवन का अंग बनता है।

   डॉ० प्रणव पण्ड्या ने कहा कि इस समारोह से न केवल विश्वविद्यालय को नयी चेतना मिलेगी अपितु उत्तराखण्ड सहित सम्पूर्ण भारत की युवा प्रतिभाओं को अपनी प्रतिभा तराशने की दिशा में प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे महापुरुषों के स्वप्न साकार होंगे और नये भारत का निर्माण संभव होगा जो विश्व नेतृत्व कर सके । उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय ने शिक्षा-सत्र के रंभ में ज्ञानदीक्षा के माध्यम से जीवनविद्या में छात्रों को दीक्षित करने का सफल और अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है ।

    दीक्षांत समारोह में उत्तराखण्ड के राज्यपाल डॉ० अजीज़ कुरैशी तथा मुख्यमंत्री श्री विजय बहुगुणा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे।

Also, please see below the news coverage of the event.

http://www.ndtv.com/article/india/president-pranab-mukherjee-to-visit-haridwar-301415" target="_blank">http://www.ndtv.com/article/india/president-pranab-mukherjee-to-visit-haridwar-301415
http://www.business-standard.com/generalnews/ians/news/president-to-visit-haridwar/88728/
http://www.business-standard.com/generalnews/news/preparations-for-presidents-visit-begin/81237/
http://www.daijiworld.com/news/news_disp.asp?n_id=155271
http://news.uttarakhandonline.in/President-to-visit-Haridwar-7396
 


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