भारतीय संस्कृति का ध्वज लेकर डॉ पण्ड्या आस्ट्रेलिया रवाना - ब्रिस्बेन में होने वाले अश्वमेध गायत्री महायज्ञ का करेंगे संचालन

Published on 2017-12-18
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       भारतीय संस्कृति का ध्वज लेकर देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ प्रणव पण्ड्या एवं संस्था की अधिष्ठात्री शैल दीदी के नेतृत्व में यज्ञ संसद का एक दल मंगलवार को आस्ट्रेलिया के लिए रवाना हुए। यह दल ब्रिस्बेन में 18 से 20 अप्रैल को होने वाला अश्वमेध गायत्री महायज्ञ का संचालन तथा आस्ट्रेलिया, फिजी, न्यूजीलैण्ड आदि देशों से पहुँचे युवाओं का मार्गदर्शन करेगा। इस दल में श्री सूरज प्रसाद शुक्ल व श्री राजकुमार वैष्णव शामिल हैं।

        विदेश की धरती पर होने वाले 11वें एवं पूरी शृंखला के 41वें अश्वमेध गायत्री महायज्ञ में आस्ट्रेलिया महाद्वीप के देशों के युवाओं, स्थानीय नागरिक एवं गायत्री परिवार के हजारों कार्यकर्ता एकत्रित होंगे। रवाना होने से पूर्व प्रखर अध्यात्मवेत्ता डॉ. पण्ड्या ने कहा कि युवाओं को सुसंस्कृत, समाजनिष्ठ बनाने में भारतीय संस्कृति एकमात्र कारगर उपाय है। उनके अन्तःकरण में देवसंस्कृति का बीजारोपण कर श्रेष्ठ भाव जाग्रत करना है। इस द्वीप में हजारों की संख्या में प्रवासी भारतीय रहते हैं, उन सबमें भी भारतीय संस्कृति के प्रति रुझान पैदा करना है। उन्होंने कहा कि सुसंस्कृत तथा राष्ट्रभावना से ओत-प्रोत होने से ही परिवार का कल्याण, समाज का उत्थान तथा संस्कृति का विस्तार व सुखद-स्थिरता की आशा की जा सकती है।

        शांतिकुंज स्थित विदेश विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह दल 18 से 20 अप्रैल को ब्रिस्बेन में होने वाले अश्वमेध गायत्री महायज्ञ का संचालन करेगा। इससे पूर्व 9 सदस्यीय दल प्रो प्रमोद भटनागर व श्री दिव्येश व्यास के नेतृत्व में आस्ट्रेलिया अश्वमेध गायत्री महायज्ञ की तैयारी के लिए गया है। दल वहाँ पहुँचकर आस्ट्रेलिया, फिजी, न्यूजीलैण्ड आदि देशों में मंथन करते हुए युवाओं एवं स्थानीय लोगों के बीच भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में संलग्र है। शांतिकुंज के अनेक वरिष्ठ कार्यकर्त्ताओं की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चरण के साथ दल को रवाना किया गया।

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