गुरुपूर्णिमा का पुण्यपर्व इस वर्ष 12 जुलाई, शनिवार  के दिन है.
हम चाहे जो हों, जैसे हों, गुरु हममें से हर एक के जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है। अपने जीवन के अतीत के बारे में सोचें, वर्तमान को परखें और भविष्य पर नजर डालें तो समूचा अस्तित्व एक साकार प्रश्न लगेगा। इस गहरी आत्मसमीक्षा में इस सत्य की स्पष्ट अनुभूति होगी कि सार्थक जीवन के लिए हमें एक दिशा, एक उद्देश्य एवं एक लक्ष्य की आवश्यकता है। इसके बिना हमारा समूचा जीवन प्रायः एक भटकन में ही बीत जाता है। हालाँकि हम जीवनभर तरह-तरह के सुखों में जीवन की सार्थकता को खोजने की कोशिश करते हैं, किंतु अंत में हमें इन सुखों की भ्रामक प्रकृति की अनुभूति होती है और बुढ़ापे में ऐसा लगने लगता है कि हम तो ठगे गए। अब तक जो किया, जो पाया वह सब व्यर्थ और अर्थहीन था।
More Read:- http://literature.awgp.org/magazine/AkhandjyotiHindi/2000/July.50">गुरुपूर्णिमा पर्व पर विशेष सद्गुरु की कृपा के अवतरण का महापर्व





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