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  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की मान्यता है कि प्रतिदिन ज्यादा से ज्यादा २५ ग्राम चीनी सेवन की जा सकती है, कोकाकोला के एक केन (छोटे) में ३९ ग्राम चीनी होती है। बच्चों पर इसका असर शराब के सेवन जैसा होता है। 
  • चीनी न केवल कैलॉरी बढ़ाती है, बल्कि शराब व तंबाकू की तरह यह दिमाग को और खाने का संकेत देती है। यह भूख का संकेत देने वाले हार्मोन घ्रलीन को भी दबा देती है। यह खाने का संतोष देने वाले हार्मोन लप्तिन को भी रोक देती है।

आम तौर पर कोकीन, हेरोइन जैसी चीजों को स्वास्थ्य के लिए सबसे खतरनाक माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन सबसे भी ज्यादा खतरनाक एक चीज है जिसकी प्रायः सारी दुनिया आदी है और वह है ‘चीनी’, जिसे शक्कर भी कहते हैं। इस चीनी की मिठास हर किसी को भाती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसे ‘धीमा मीठा जहर’ कहा जाये तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। 

एम्सटर्डम (हॉलैण्ड) की स्वास्थ्य सेवाओं के प्रमुख पॉल वान वेल्पेन का कहना है कि चीनी हमारे समय की सबसे खतरनाक ड्रग है। यह हमारी भूख में गड़बड़ी पैदा करके खाते ही रहने की इच्छा पैदा करती है। जिन्हें भी चीनीयुक्त पदार्थ खाने की लत लग जाती है वह भूख न होने पर भी अधिक से अधिक मीठा खाने की चेष्टा करता है। वेम्पेन  ने अपने देश में चीन पर कड़ा नियंत्रण किये जाने की माँग की है। 

वेम्पेन अकेले नहीं हैं। कैलिफोर्निया यूनिवॢसटी, सेन फ्रांसिस्को के रॉबिन लस्टिग तो इसे ठोस अल्कोहोल बताते हैं। उनका मानना है मोटापा ही गंभीर बीमारियों का कारण नहीं है। उसे तो कंट्रोल किया जा सकता है। लेकिन ४० प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिनका वजन सामान्य है, लेकिन उन्हें डायबिटीज, हाइपरटेंशन, लिपिड समस्या, हृदय व धमनियों से जुड़ी बीमारियाँ, फैटी लिवर डिसीज, कैंसर या याददाश्त खोने जैसे रोग हैं। ये मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी से होने वाली बीमारियाँ हैं। चीनी इसमें बहुत हद तक जिम्मेदार है। 

चीनी न केवल कैलॉरी बढ़ाती है, बल्कि शराब व तंबाकू की तरह यह दिमाग को और खाने का संकेत देती है। यह भूख का संकेत देने वाले हार्मोन घ्रलीन को भी दबा देती है। यह खाने का संतोष देने वाले हार्मोन लप्तिन को भी रोक देती है।

शरीर में चीनी को हजम करने की सीमित क्षमता है। व्यायाम से इसे थोड़ा बढ़ाया भी जा सकता है, जिसकी भी एक सीमा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मान्यता है कि प्रतिदिन ज्यादा से ज्यादा २५ ग्राम चीनी सेवन की जा सकती है, हालॉकि इस वर्ष इस पर डब्ल्यूएचओ इस मसले पर अधिकाधिक विचार-विमर्श करने वाला है। 

कोकाकोला के एक केन में ३९ ग्राम चीनी होती है। बच्चों पर इसका असर शराब के सेवन जैसा होता है। 

संदर्भ ः दैनिक भास्कर, नागपुर २ जुलाई १४


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