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रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति की महानता का परिचय कराती हैं। वर्तमान समय की विषम परिस्थितियों में जब नारी की अस्मिता पर क्रूर आघात हो रहे हैं, तो इसका महत्त्व और भी अधिक बढ़ जाता है। आज हमें इस पर्व पर यह भी सोचना है कि क्या हम सचमुच बलि राजा को बांधे गए रक्षा सूत्र की तरह अपने बटोरे हुए वैभव की बलि राष्ट्रहित में दे सकते हैं?

हम राखी बंधवाते हैं और हमारी बहिनें हमसे अपनी राखी की कीमत संजोये बैठी रहती हैं। उनकी अपनी भाइयों से अपने दु:ख दर्द में सहयोग की अपेक्षा भी रहती है और एक हम हैं, जो राखी बंधवाने की औपचारिकता पूरी करते हुए उन्हें कोई भेंट देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री समझ लेते हैं।

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