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ईश्वर की इच्छा, हमारी जिम्मेदारी हम यज्ञमय जीवन जिएँ

जीवन और यज्ञ गीताकार का कथन है- सहयज्ञा: प्रजा: सृष्ट्वा पुरोवाच प्रजापति:। अनेन प्रसविष्यध्वमेष वोऽस्त्विष्टकामधुक्।। गीता 3/10 अर्थात्.....

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तमसो मा ज्योतिर्गमय

प्रकाश ही जीवन है प्रकाश ही जीवन है और अन्धकार ही मरण। प्रकाश में वस्तुओं का स्पष्ट रूप दर्शाने.....